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Kanpur: शेयर बाजार में 25% घटी नए निवेशकों की रफ्तार, निफ्टी-सेंसेक्स में 11% की गिरावट, कारोबार भी सिमटा

Sat, 04 Apr 2026 01:01 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: सेबी के नवीनतम मासिक बुलेटिन के अनुसार एनएसई के कैश सेगमेंट में कानपुर की हिस्सेदारी लगभग 0.20 प्रतिशत है, जबकि बीएसई के कैश सेगमेंट में शहर की औसत हिस्सेदारी करीब 0.042 प्रतिशत है।
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राजीव सिंह - फोटो : Amar ujala
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विस्तार
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अमेरिका-ईरान-इस्राइल के बीच युद्ध की वजह से मार्च में निफ़्टी और सेंसेक्स में 11 फीसदी से ज्यादा की गिरावट हो चुकी है जिसका सीधा असर निवेशकों के पोर्टफोलियो और शेयर कारोबार पर भी पड़ा है। सेबी की ओर से जारी मासिक बुलेटिन के आंकड़ों पर गौर करें, तो पता चलता है कि युद्ध से पहले जनवरी-फरवरी में शेयर बाजार के कैश सेगमेंट में शहर के निवेशकों ने प्रतिमाह करीब पांच हजार करोड़ रुपये का कारोबार किया था, जो मार्च में घटकर 3600 करोड़ रुपये हो गया है।

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इन आंकड़ों को अगर प्रतिदिन के कारोबार के हिसाब से देखें तो जनवरी-फरवरी में कैश सेगमेंट में जहां औसत शेयर कारोबार 250 करोड़ रुपये प्रतिदिन से ज्यादा था जो अब 190 करोड़ रुपये प्रतिदिन के आसपास रह गया है। यूपी स्टॉक एक्सचेंज की विरासत रखने वाले शहर कानपुर का म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में खासा निवेश है। प्रदेश में दूसरी रैंकिंग रखने वाले कानपुर देश में भी टॉप 15 शहरों की सूची में शामिल हैं। म्यूचुअल फंड में तो कानपुर का निवेश पूरे उत्तराखंड राज्य से भी ज्यादा है। शहर की हिस्सेदारी देश के कुल निवेश में 0.47 प्रतिशत है।

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नए निवेशकों के जुड़ने की रफ्तार में करीब 25 फीसदी की कमी

सेबी के नवीनतम मासिक बुलेटिन के अनुसार एनएसई के कैश सेगमेंट में कानपुर की हिस्सेदारी लगभग 0.20 प्रतिशत है, जबकि बीएसई के कैश सेगमेंट में शहर की औसत हिस्सेदारी करीब 0.042 प्रतिशत है। बीएसई के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में कानपुर सहित उप्र में नए निवेशकों के जुड़ने की रफ्तार 1.80 प्रतिशत थी, जो मार्च में घटकर 1.36 प्रतिशत रह गई। फरवरी में उत्तर प्रदेश में तहां 4.20 लाख नए निवेशक जुड़े थे। वहीं, मार्च में यह संख्या 3.87 लाख रह गई है। यानि मार्च में शहर के शेयर कारोबार और नए निवेशकों के जुड़ने की रफ़्तार में करीब 25 फीसदी की कमी हुई है।
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युद्ध से शहर के शेयर बाजार में निवेश और निवेशकों की रफ्तार में 25 प्रतिशत की कमी देखी गई है। तमाम निवेशक अभी वेट एंड वाच की रणनीति अपना रहे हैं और बड़े फैसलों से बच रहे हैं। हालांकि इस समय मजबूत फंडामेंटल और बेहतर ग्रोथ पोटेंशियल वाली कंपनियों में किस्तों में निवेश करना एक बेहतर रणनीति हो सकती है। एसआईपी के जरिए नियमित निवेश जारी रखना चाहिए।  -राजीव सिंह, को फाउंडर, केश्री ब्रोकिंग
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