मौके पर चार्जिंग स्टेशन का अस्तित्व नहीं
लेकिन मौके पर ऐसा कोई चार्जिंग स्टेशन नहीं मिला। यही स्थिति झकरकटी में रॉयल गार्डन के पास बताए जा रहे चार्जिंग स्टेशन की है। ऑनलाइन मैप पर स्टेशन की लोकेशन दिखती है, जबकि मौके पर उसका अस्तित्व नहीं नजर आया। गूगल पर जिस जगह स्टेशन दिख रहा है, वहां दुकान लगाने वाले युवक ने बताया कि स्टेशन बनाने का तीन दिन काम हुआ, उसके बाद से कोई नहीं आया। शास्त्री चौक के पास चार्जिंग स्टेशन बनाने का करार था, लेकिन नहीं बना।
कभी कोई वाहन चार्ज ही नहीं हुआ
दबौली में हरमिलाप मिशन स्कूल के पास बने चार्जिंग स्टेशन की क्षमता 10 किलोवॉट है। क्षेत्रीय लोगों के अनुसार स्टेशन बनने के बाद से आज तक यहां कोई ई-वाहन चार्ज होते नहीं दिखा। पहले इसमें बिजली आती थी। करीब दस महीने से सप्लाई बंद है। चार्जिंग स्टेशन के आसपास कबाड़ वालों के ठेले खड़े रहते हैं। स्टेशन पर लगाया गया अडानी नाम का बोर्ड टूट चुका है। चार्जर और कनेक्टर की स्थिति खराब है।
रतनलालनगर में तारों से घिरा स्टेशन
जैना पैलेस के पास बना चार्जिंग स्टेशन बदहाल है। इसे कंटीले तारों से घेर कर सामने दो गुमटियां रख दी गई हैं। टूटी हुई डालें भी चार्जिंग स्टेशन को ढंके हुए हैं। ई-वाहन चालक यहां पहुंच भी जाए तो चार्जिंग तक पहुंचना आसान नहीं है। मौके पर बिजली की लाइन भी बंद मिली।
डिप्टी पड़ाव में दो दिन चला काम फिर ठप
यहां चार्जिंग स्टेशन पेट्रोल पंप के सामने बना है। क्षेत्रीय लोगों ने बताया कि स्टेशन शुरू होने के बाद महज दो दिन तक वाहनों की चार्जिंग हुई, इसके बाद यह खराब हो गया। तब से कोई भी इसकी मरम्मत करने नहीं आया। अब इसके सामने खटारा वाहन खड़े हो रहे हैं।
18 स्टेशन का दावा सुविधा बिल्कुल नहीं
शहर में टाटमिल, डिप्टी पड़ाव, कोपरगंज, नौबस्ता, किदवईनगर, साकेत नगर, स्काउट भवन, दबौली, गुजैनी, शास्त्री चौक, फजलगंज, सरायमीता, महाबलीपुरम, विश्वविद्यालय के पास, एचबीटीयू और रतनलाल नगर समेत 18 स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन बनने थे। दबौली, डिप्टी पड़ाव और रतनलालनगर के चार्जिंग स्टेशन उदाहरण हैं कि स्टेशन बनने के बाद उनकी नियमित बिजली आपूर्ति, रखरखाव, सुरक्षा और वास्तविक उपयोगिता पर ध्यान नहीं दिया गया।
संबंधित कंपनी से चार्जिंग स्टेशन की हालत और रखरखाव की जानकारी जुटाई जाएगी। चार्जिंग स्टेशनों को जल्द ही उपयोग के लायक बनाया जाएगा। -अर्पित उपाध्याय, नगर आयुक्त