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Kanpur: प्रिंटिंग-पैकेजिंग उद्योग में एक शिफ्ट बंद, कच्चा माल 40 फीसदी महंगा, कारोबारियों ने मांगी मदद

Sun, 22 Mar 2026 04:05 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: ईरान-इजरायल युद्ध के चलते कच्चे माल के दामों में 40% तक की बढ़ोतरी से कानपुर का प्रिंटिंग-पैकेजिंग उद्योग संकट में है। उत्पादन 50% रह गया है और 250 इकाइयों में तालाबंदी का खतरा पैदा हो गया है।
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प्रिंटिंग उद्योग पर गैस संकट की मार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानपुर में अमेरिका, इस्राइल और ईरान युद्ध से अब प्रिंटिंग-पैकेजिंग इकाइयों पर संकट आ गया है। इकाइयों में एक शिफ्ट बंद कर दी गई है। अलग-अलग कच्चा माल 10-40 प्रतिशत तक महंगा हो गया है। शहर में 250 इकाइयां हैं, जिनमें 5000-8000 लोगों को रोजगार मिलता है। इकाई संचालकों ने अन्य उद्योगों से मदद की अपील की है।

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कहा गया है कि ग्राहक लागत बढ़ने के आधार पर मूल्य बढ़ाएं और कच्चा माल आपूर्ति करने वाले दाम न बढ़ाएं। स्टॉक भी न करें। कानपुर प्रेस ओनर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियाें और उद्यमियों की बैठक उद्योग कुंज स्थित कार्यालय पर हुई। बताया गया कि पिछले कुछ समय में डुप्लेक्स एवं अन्य पेपर बोर्ड की कीमतों में 10-12 प्रतिशत, लैमिनेशन फिल्म्स में 35-40 प्रतिशत और क्राफ्ट पेपर व प्रिंटिंग इंक में 10-12 प्रतिशत की तेजी आ गई है।

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50 प्रतिशत रह गया है उत्पादन
कुछ एडहेसिव्स (चिपकाने वाले पदार्थ) और विशेष उपभोग्य सामग्रियों में भी 30-35 फीसदी तक की वृद्धि हुई है। इससे उत्पादन लागत में वृद्धि हो रही है। उद्योग चलाना मुश्किल हो गया है। एक शिफ्ट बंद कर दी गई है। भाव और बढ़े तो उद्योगों में तालाबंदी की नौबत आ सकती है। उत्पादन 50 प्रतिशत रह गया है। बैठक में गोविंद भार्गव, सुब्रत लूथरा, अमरनाथ मेहरोत्रा, वैभव भार्गव, सोमनाथ मेहरोत्रा, राहुल भार्गव, संजीव चावला आदि मौजूद रहे।

प्रिंटिंग-पैकेजिंग उद्योग से जुड़े अन्य उद्योगों से वर्तमान परिस्थितियों की गंभीरता और वास्तविकता को समझने की अपील की गई है। लागत में लगातार वृद्धि के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए सहयोग मांगा गया है। लागत मूल्य बढ़ने के अनुपात में उत्पादों के दाम बढ़ाने के लिए कहा गया है, ताकि उद्योग चल सकें।  -अवधेश अवस्थी, अध्यक्ष, कानपुर प्रेस ओनर्स एसोसिएशन
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अलग-अलग कच्चा माल 10-40 प्रतिशत तक बढ़ गया है। कच्चे माल की उपलब्धता भी कम हो गई है। इसके चलते एक शिफ्ट बंद कर दी गई है। शहर में 250 से ज्यादा प्रिंटिंग-पैकेजिंग इकाइयां हैं। लागत मूल्य नहीं बढ़ा, तो उद्योगों को पूरी तरह से बंद करने की नौबत आ सकती है।  -दिनेश बरासिया, महामंत्री, कानपुर प्रेस ओनर्स एसोसिएशन
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