50 प्रतिशत रह गया है उत्पादन
कुछ एडहेसिव्स (चिपकाने वाले पदार्थ) और विशेष उपभोग्य सामग्रियों में भी 30-35 फीसदी तक की वृद्धि हुई है। इससे उत्पादन लागत में वृद्धि हो रही है। उद्योग चलाना मुश्किल हो गया है। एक शिफ्ट बंद कर दी गई है। भाव और बढ़े तो उद्योगों में तालाबंदी की नौबत आ सकती है। उत्पादन 50 प्रतिशत रह गया है। बैठक में गोविंद भार्गव, सुब्रत लूथरा, अमरनाथ मेहरोत्रा, वैभव भार्गव, सोमनाथ मेहरोत्रा, राहुल भार्गव, संजीव चावला आदि मौजूद रहे।
प्रिंटिंग-पैकेजिंग उद्योग से जुड़े अन्य उद्योगों से वर्तमान परिस्थितियों की गंभीरता और वास्तविकता को समझने की अपील की गई है। लागत में लगातार वृद्धि के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए सहयोग मांगा गया है। लागत मूल्य बढ़ने के अनुपात में उत्पादों के दाम बढ़ाने के लिए कहा गया है, ताकि उद्योग चल सकें। -अवधेश अवस्थी, अध्यक्ष, कानपुर प्रेस ओनर्स एसोसिएशन
अलग-अलग कच्चा माल 10-40 प्रतिशत तक बढ़ गया है। कच्चे माल की उपलब्धता भी कम हो गई है। इसके चलते एक शिफ्ट बंद कर दी गई है। शहर में 250 से ज्यादा प्रिंटिंग-पैकेजिंग इकाइयां हैं। लागत मूल्य नहीं बढ़ा, तो उद्योगों को पूरी तरह से बंद करने की नौबत आ सकती है। -दिनेश बरासिया, महामंत्री, कानपुर प्रेस ओनर्स एसोसिएशन