इनकी भारी कमी उजागर हुई
उत्तर रेलवे के लखनऊ स्टेशन पर भीषण गर्मी में ठंडा पानी देने वाले वॉटर कूलर मानक से कम मिले। वहीं, चारबाग व लखनऊ जंक्शन पर यात्रियों को दिशा-निर्देश देने वाले साइन बोर्ड गायब या अधूरे पाए गए। अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र वाराणसी जंक्शन पर बुनियादी जरूरत यानी पीने के पानी के नल, वॉटर कूलर और साइन बोर्ड की भारी कमी उजागर हुई है। राहत भरी बात यह भी है कि वाराणसी के ही बनारस स्टेशन ने सभी 16 न्यूनतम मानक पूरे किए हैं।
बजट की कमी नहीं, पैसा बिना खर्च किए लौटाया
रिपोर्ट के अनुसार, यात्री सुविधाओं में कमी की वजह बजट का न होना नहीं है बल्कि अधिकारियों की लापरवाही है। कानपुर और प्रयागराज का संचालन करने वाले एनसीआर ने बीते पांच वर्षों में यात्री सुविधाओं के तहत मिले बजट का 50% से 82% तक हिस्सा बिना खर्च किए सरेंडर कर दिया। वर्ष 2020-21 में 918.87 करोड़ रुपये के बजट में 163.71 करोड़ खर्च किए गए और 755.16 करोड़ बिना काम कराए वापस लौटा दिए गए। इसी तरह से वर्ष 2023-24 में 994.70 करोड़ रुपये में से केवल 500.27 करोड़ खर्च हुए और 494.43 करोड़ वापस लौटा दिए गए।
स्वच्छता, सुरक्षा और बैठकों के मोर्चे पर भी बदहाली
एनसीआर के सभी 32 चयनित स्टेशनों पर पान और गुटके की पीक के दाग मिले। 21 स्टेशनों पर शौचालय गंदे मिले। 11 स्टेशनों पर वॉटर बूथ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाए गए। 29 स्टेशनों पर आवारा कुत्तों का जमावड़ा मिला। 20 स्टेशनों पर अनधिकृत प्रवेश द्वार मिले। रिपोर्ट के अनुसार, जनता और यात्रियों की शिकायतें उठाने के लिए बनी मंडल रेल उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति की बैठकें कराने में भी घोर लापरवाही बरती गई। प्रयागराज मंडल में वर्ष 2022-23 और 2023-24 में एक भी बैठक आयोजित नहीं की गई।