सहारनपुर की डिस्टलरी से करोड़ों रुपये की शराब फर्जी बार कोड पर लेकर उन्नाव के साथ-साथ कानपुर में भी खपाई गई। शराब कारोबारी के ठेके कानपुर नगर में भी हैं। यही वजह है कि एसआईटी ने आबकारी निरीक्षक ज्योति सिंह पर कार्रवाई की है।
ज्योति सिंह थोक शराब की सप्लाई देखती थीं। हालांकि सहारनपुर पुलिस व एसटीएफ ने जिस तरह का फर्जीवाड़ा पकड़ा है, उससे आबकारी के अफसर भी घेरे में आ गए हैं। ये पूरा खेल ही मिलीभगत से चल रहा था। फिलहाल शराब कारोबारी का एक ठेका निलंबित कर दिया गया है।
एसटीएफ और आबकारी के अधिकारियों ने बीते बुधवार को उन्नाव के मोती नगर स्थित देसी शराब ठेके पर दबिश दी थी। जांच में पता चला कि सहारनपुर स्थित डिस्टलरी से शराब कारोबारी अजय जायसवाल ने सांठगांठ कर रखी थी। यहां से एक ही बार कोड पर दो बार माल सप्लाई होता है।
सहारनपुर में अजय के खिलाफ केस भी दर्ज है। कानपुर के दादा नगर में उसका देसी शराब का ठेका हैं। यहां पर काफी समय से फर्जीवाड़ा कर करोड़ों रुपये की शराब खपाई जा रही थी। आबकारी विभाग ने ठेका निलंबित कर मालिक को नोटिस भी भेजा है।
आखिर अफसर क्या कर रहे थे
शुरुआती जांच के बाद आबकारी इंस्पेक्टर ज्योति सिंह पर कार्रवाई की गई है। सवाल है कि क्या पूरी जिम्मेदारी उनकी ही थी। आबकारी के उच्चाधिकारी क्या कर रहे थे। आखिर वो क्यों नहीं समय समय पर चेकिंग और निगरानी करते हैं।
सूत्रों के मुताबिक मामले की जांच कर रही एसआईटी अब अफसरों की भी भूमिका तलाश रही है। आशंका है कि खेल में कई अफसरों की मिलीभगत है। कुछ की लापरवाही भी सामने आ रही है। जांच पूरी होने के बाद आगे कार्रवाई होगी।