जीएसटी आने के बाद से चली आ रही थी मांग
अभी जीएसटी की प्रथम अपील की सुनवाई हाईकोर्ट में होती है। कानपुर का क्षेत्राधिकार इलाहबाद हाईकोर्ट में है। 2017 में जीएसटी आने के बाद जीएसटी की अपीलों की सुनवाई के लिए ट्रिब्यूनल बेंच बनाने की मांग की जा रही थी। दिल्ली में प्रधानपीठ की स्थापना के बाद से राज्यवार ट्रिब्यूनल बेंच का गठन होने पर शहर के उद्यमियों को उम्मीद थी कि यहां की उद्यमी और व्यापारिक स्थिति को देखते हुए शहर में अपील ट्रिब्यूनल की बेंच का गठन होगा, लेकिन शहर को मायूसी हाथ लगी है।
इस बार आठ हजार करोड़ जीएसटी का है लक्ष्य
इस साल कानपुर का जीएसटी का लक्ष्य आठ हजार करोड़ रुपये है, जबकि आगरा का 3800 करोड़, वाराणसी का 6400 करोड़ है। इसके बाद भी इन शहरों में सर्किट बेंच की बात कही गई है, कानपुर को सर्किट बेंच तक नहीं दी गई।
उद्यम पंजीकरण में भी अपना शहर आगे
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के साथ ही शहर में सेवा क्षेत्र भी आगे बढ़ रहा है। उद्यम पंजीकरण में शहर का पूरे प्रदेश में चौथा स्थान है। 10 जून तक एक लाख चार हजार से ज्यादा उद्यम पंजीकरण शहर में हो चुके हैं। कानपुर से आगे नोएडा, गाजियाबाद और लखनऊ हैं, जबकि आगरा पांचवें और प्रयागराज आठवें स्थान पर है।
ऐसा लगता है कि सरकार की नजर में कानपुर कुछ है ही नहीं। जीएसटी अपील ट्रिब्यूनल बेंच का कानपुर में गठन न होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। संस्था की ओर से लंबे समय से प्रयास किए जा रहे थे, लेकिन इतना टैक्स देने और चमड़ा उत्पादों का निर्यात होने के बाद भी ये स्थिति है। -सुनील वैश्य, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, आईआईए
कानपुर नगर में अपील ट्रिब्यूनल का न होना बहुत निराशाजनक है। सर्वाधिक समस्या इसमें कानूनी रूप से आएगी, क्योंकि कानपुर हाई कोर्ट की इलाहाबाद बेंच के अधीन आता है। लखनऊ की जीएसटी ट्रिब्यूनल हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के अधीन है। बहुत सारे मामलों की अपील और जीएसटी की विधेक अपील में अलग-अलग हाई कोर्ट की बेंच में जाना पड़ेगा। -उमंग अग्रवाल, महासचिव, फीटा
कानपुर प्रदेश की औद्योगिक एवं व्यापारिक राजधानी है। इसलिए कानपुर में ट्रिब्यूनल का होना अति आवश्यक है। अधिवक्ता, सीए, सीएस भी इसकी मांग कर रहे थे। लखनऊ में ट्रिब्यूनल बनने से कानपुर के अपील मामलों की वहां पर सुनवाई हो सकेगी। -संतोष कुमार गुप्ता, वरिष्ठकर अधिवक्ता