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क्लास में कत्ल: कोई जिंदा कर दो मेरे जिगर के टुकड़े को... मैं नहीं ले जाने दूंगी; मेरे लाल तुम कहां चले गए

Wed, 02 Aug 2023 09:41 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर

सार

कानपुर के बिधनू के गंगापुर कॉलोनी के इंटर कॉलेज में सोमवार को सनसनीखेज वारदात से हड़कंप मच गया। क्लास में ही एक छात्र ने अपने सहपाठी की हत्या कर दी। छात्र-छात्राओं से भरी कक्षा में साथी को चाकू से गोदकर मार डाला। आरोपी छात्र ने सभी वार गले पर किए, ताकि बचने की कोई गुंजाइश न रहे।
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Kanpur Murder in classes - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानपुर के बिधनू की गंगापुर कॉलोनी में प्रयाग विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में कक्षा 10 के सहपाठी छात्र नीलेंद्र की हत्या की घटना ने सभी झकझोरकर रख दिया है। डीआईओएस फतेह बहादुर सिंह ने मामले की विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। उनका कहना है कि जल्द ही जांच के लिए कमेटी का गठन किया जाएगा। 
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वहीं, सोमवार को कई स्कूलों में इस घटना को लेकर चर्चा होती रही। प्रधानाचार्यों ने शिक्षकों की बैठक बुलाकर सतर्क रहने के आदेश दिए। आदेश दिए कि स्कूल की हर छोटी से छोटी घटना की जानकारी प्रबंधन को दी जाए। शिक्षित करने साथ बच्चों को दीक्षित करने पर जोर दिया। प्रधानाचार्यों ने क्लास, स्कूल मॉनीटर को भी एक्टिव मोड पर काम करने के निर्देश दिए हैं।

'कोई जिंदा कर दो मेरे जिगर के टुकड़े को'
मेरे लाल... तुम अपने मम्मी-पापा पर दुखों का पहाड़ गिराकर कहां चले गए...। अब तुम्हारे मम्मी पापा किसके सहारे जिएंगे। एक बार आंखें खोल दो। कोई मेरे लाल को वापस ला दो। बदले में मेरा सबकुछ ले लो। मेरे बच्चे का कोई कसूर नहीं था। क्यों मार डाला मेरे बच्चे को। इकलौते बेटे नीलेंद्र के शव को देखकर बिलखती मृतक की बेबस मां पूनम के इन शब्दों को सुनकर भीड़ में खड़े हर शख्स का दिल रो दिया। बहन राधिका शव से लिपटकर बोली, भइया रक्षाबंधन पर राखी किसको बांधूंगी।
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आपको बता दें कि कानपुर के बिधनू के गंगापुर कॉलोनी के इंटर कॉलेज में सोमवार को सनसनीखेज वारदात से हड़कंप मच गया। क्लास में ही एक छात्र ने अपने सहपाठी की हत्या कर दी। छात्र-छात्राओं से भरी कक्षा में साथी को चाकू से गोदकर मार डाला। आरोपी छात्र ने सभी वार गले पर किए, ताकि बचने की कोई गुंजाइश न रहे। 
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सोमवार को स्कूल की पहली मंजिल पर जो हुआ, उसे देख जहां एक ओर अधिकांश बच्चे सहमे हैं, वहीं कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने हिम्मत जुटाकर बचाने का प्रयास किया था। हालांकि जब तक वह हमलावर को पकड़कर काबू में कर पाते, उसने नीलेंद्र पर कई वार कर दिए थे। हमला होते ही क्लास में मौजूद छात्राओं और छात्रों में चीख-पुकार मच गई।

 

शोर सुनकर 11वीं क्लास का एक छात्र अपने साथी के साथ भागकर क्लास के दरवाजे पर पहुंचा। उनकी नजर के सामने नीलेंद्र जमीन पर था, उसके गले से खून की धार बह रही थी। इसके बावजूद हमलावर गालीगलौज करते हुए उसपर अगले हमले के लिए कदम बढ़ा चुका था। 

 

दोनों उसे पकड़ने पहुंचे लेकिन पकड़ने से पहले ही हमलावर छात्र ने एक सांस में कई वार नीलेंद्र के गले और सीने पर कर दिए। उन्होंने छात्र को पकड़ा। आसपास मौजूद छात्र भी आगे आए, इस बीच शोर सुनकर कुछ शिक्षक भी पहुंच गए। 

 

चाकू छुड़वाने के समय भी हमलावर की चाकू पर पकड़ बेहद मजबूत थी। नीलेंद्र के घर के नजदीक रहने वाले एक अन्य छात्र ने बताया कि हमलावर को देखकर लगा जैसे उस पर नीलेंद्र की हत्या का जुनून सवार है। भारी मन से बोला कि काश वह पहले पहुंच जाता तो शायद नीलेंद्र बच जाता।

 

मामला गंभीर, जल्द होगी विभागीय जांच
यह बेहद गंभीर मामला है। मामले की जल्द ही विभागीय जांच कराई जाएगी। टीम का गठन कर घटना की संपूर्ण जानकारी जुटाई जाएगी। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी। -डॉ. फतेह बहादुर सिंह, डीआईओएस

 

हर स्कूल में तैनात हो काउंसलर
हर बच्चा अलग मनोवृत्ति का होता है। सामान्य शिक्षक छात्रों की मनोदशा को नहीं भांप सकता है। ऐसे में स्कूल में काउंसलर की तैनाती अनिवार्य कर दी जाए। काउंसलर की नियुक्ति से कम से फायदा होगा कि हिंसक मनोवृत्ति वाले छात्र को पहचान कर अलग काउंसलिंग की जा सकेगी। साथ ही किशोरावस्था के झगड़ों को स्कूल गंभीरता से लें। -प्रो. बृजभूषण, आईआईटी, सोशल साइंस विभाग

 

मोबाइल, टीवी ने हत्या शब्द को हल्का किया
स्कूलों में नैतिक शिक्षा पर जोर देने की आवश्यकता है। मोबाइल, टीवी के हिंसक शो ने हत्या शब्द को हल्का कर दिया है। नैतिक शिक्षा, संस्कारयुक्त शिक्षा बेहद जरूरी है। स्कूल स्तर पर छात्रों की मॉनीटरिंग, अभिभावकों की काउंसलिंग, छात्रों को योग की ओर ले जाना बेहद जरूरी है। शिक्षकों और छात्रों के बीच कम्युनिकेशन गैप दूर करना जरूरी है। स्कूल में सख्ती इतनी न हो कि बच्चा अपने मन की बात न कह सके। -डॉ. पूजा अवस्थी, एमडी, ओंकारेश्वर सरस्वती विद्या निकेतन

 

पुरानी पद्धति की शिक्षा जरूरी
तकनीकी युग से बाहर निकलकर अब पुरानी पद्धति की शिक्षा की ओर बढ़ने की जरूरत है। संस्कारयुक्त शिक्षा की ओर बढ़ने के अलावा और कोई चारा नहीं है। स्कूल का माहौल ऐसा बनाएं कि हर बच्चा अपने मन की बात कह सके। नियमित काउंसलिंग, प्रेरक प्रसंग से छात्रों को मोटीवेट करें। क्लास शिक्षक और मॉनीटर को कक्षा के हर छात्र के बारे में गहनता से पता होना चाहिए। -बृजमोहन सिंह, प्रधानाचार्य, बीएनएसडी शिक्षा निकेतन

 
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शिक्षकों के साथ अभिभावक भी दें ध्यान
स्कूल, शिक्षक, अभिभावकों का बड़ा रोल है। घटना के बाद शिक्षकों की बैठक बुलाकर हर मामले को गंभीरता से एक्शन लेने को कहा है। छोटी लड़ाई पर भी शिक्षक, प्रिंसिपल को जानकारी मिले। इसके अलावा क्लास के शिक्षकों को छात्रों की काउंसलिंग के लिए पांच मिनट की अवधि निर्धारित कर दी गई है। -डॉ. रचना अवस्थी, प्रधानाचार्य, पारितोष इंटर कॉलेज
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