अगले एक साल में प्रोजेक्ट स्थापित हो जाएगा
विशेष सचिव ने सरकारी एजेंसी से कार्य कराने के निर्देश दिए, जिसके बाद निगम ने आठ जून को यूपीनेडा के निदेशक को इसके लिए कंसलटेंट नियुक्त करने और डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने को पत्र लिखा है। यूपीनेडा की एक टीम ने प्लांट के लिए चिह्नित जमीन का निरीक्षण कर सैद्धांतिक सहमति दे दी है। माना जा रहा है कि जुलाई में डीपीआर बन जाएगा और अगले एक साल में प्रोजेक्ट स्थापित हो जाएगा।
नेशनल ग्रिड में होगी सप्लाई
सोलर मेगा प्लांट में हर महीने 25 मेगावाट बिजली उत्पादन होगा, जिसे नेशनल ग्रिड में सप्लाई किया जाएगा। नेशनल ग्रिड को जितनी बिजली दी जाएगी, उतनी ही बिजली घटाकर नगर निगम और जलकल विभाग केस्को को भुगतान करेगा।
अभी कितना है नगर निगम का खर्च
शहरवासियों की प्यास बुझाने और सड़कें रोशन करने में ही हर महीने 9 करोड़ रुपये की बिजली खर्च होती है। सभी पंपिंग स्टेशन, जल शोधन संयंत्र व नलकूप के संचालन में हर महीने करीब 19000 किलोवॉट बिजली खर्च होती है। जलकल विभाग के महाप्रबंधक एके त्रिपाठी ने बताया कि बिजली के मद में उनका विभाग केस्को को हर महीने करीब 4 करोड़ रुपये भुगतान करता है। इसी तरह नगर निगम की रिपोर्ट के अनुसार शहर में 1.24 लाख स्ट्रीट लाइटें जलाने में हर महीने करीब 5 करोड़ रुपये की बिजली खर्च होती है।
सोलर प्लांट स्थापित करने के लिए आईआईटी कंसलटेंसी करेगा। उनके दिशा - निर्देश पर यूपीनेडा प्लांट स्थापना करेगा। इस काम में आने वाले खर्च को म्यूनिसिपल बांड से मिलने वाले पैसे से पूरा किया जाएगा। -शिवशरणप्पा जीएन, नगर आयुक्त