कानपुर के मैकराबर्ट हॉस्पिटल सोसाइटी में स्थान पाने को लेकर मचे घमासान को लेकर कहा जा रहा है कि इसकी सबसे बड़ी वजह हॉस्पिटल की 32000 गज जमीन है। इसकी वर्तमान कुल लागत 500 करोड़ के आसपास बताई जा रही है।
कोरोना काल के दौरान आरके लोहिया की तरफ से नर सेवा, नारायण सेवा नामक संस्था की देखरेख में इसका जीर्णोद्धार करा कर इसमें मरीजों को भर्ती करने का प्रयास किया गया था। प्रशासन की तरफ से भी रजामंदी दी गई थी।
उस समय भी यह बात उठी थी कि जमीन खुर्दबुर्द करने के लिए यहां तरह तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। दोनों गुटों की तरफ से आरोप-प्रत्यारोप भी लगाए गए थे। मैकरॉबर्ट हॉस्पिटल का निर्माण ब्रिटिश काल में नगर में रहने वाले अंग्रेजों के उपचार के लिए किया गया था।
अस्पताल के संचालन और प्रबंधन का जो प्रस्ताव सरकार को दिया गया है, वह गलत है। मैं इसका विरोध करता हूं। प्रबंधन और सोसाइटी में सदस्यों को लेकर मामला कोर्ट में चल रहा है। ऐसे में कोई फैसला नहीं लिया जा सकता है। 14 फरवरी की बैठक में भी सिर्फ चार लोग थे। मर्जरी दत्ता भारत से काफी समय से बाहर रह रही हैं, इसलिए सोसायटी बाइलॉज के हिसाब से वह बैठक का हिस्सा नहीं हो सकती हैं।
डॉ एमएल चौधरी सचिव मैकराबर्ट मेमोरियल हॉस्पिटल सोसायटी
सोसाइटी के 5 सदस्यों की बैठक में अस्पताल के संचालन और प्रबंधन की व्यवस्था सरकार को देने का फैसला लिया गया और इस प्रस्ताव को डिप्टी रजिस्ट्रार को सौंप भी दिया गया है। यह सब इसलिए किया गया है जिससे शहर के लोगों को अच्छा इलाज मिल सके।
आरके लोहिया सदस्य (गवर्नर) मैकराबर्ट मेमोरियल हॉस्पिटल सोसाइटी
सोसायटी में सदस्यता निरस्त किए जाने का मामला कोर्ट में लंबित है। ऐसे में जब तक कोर्ट का कोई फैसला ना आ जाए, किसी भी तरह का दूसरा फैसला सोसाइटी की तरफ से लिया जाना सही नहीं है। कुछ लोग अपने तरीके से इस सोसाइटी को चलाना चाहते हैं।
कमल भाटिया पूर्व सदस्य