इसे भूतल परिवहन मंत्रालय भेजने का आग्रह भी किया। प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने राज्य सरकार से मंजूरी मांगी थी, जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वीकार कर लिया है।
राज्य सरकार जल्द ही इस बाबत अनापति प्रमाण पत्र (एनओसी) भारत सरकार को भेज देगी। इस एक्सप्रेस-वे का निर्माण कराने के लिए डीपीआर तैयार कराने का काम मेसर्स इजिस (इंडिया) कंसल्टिंग इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड कर रही है। इस एक्सप्रेस-वे की लंबाई 63 किलोमीटर है।
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे को जब तक राष्ट्रीय राजमार्ग का दर्जा नहीं मिल जाता, तब तक एनएच एक्ट भी नहीं नहीं लागू होता। इसके बिना राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए जमीन अर्जित नहीं कर सकते। जमीन अर्जन के लिए धारा - 3डी के तहत अधिसूचना जारी कर दी गई है। अब एवार्ड होगा, जिसके तह जमीन की कीमत तय कर एसडीएम मांगेंगे। काश्तकारों के खातों में पैसा पहुंचते ही जमीन एचएनएआई की हो जाएगी। यह प्रक्रिया मार्च - अप्रैल तक पूरी करने की कोशिश की जा रही है। मार्च में इसके निर्माण के लिए टेंडर करेंगे।
एनएन गिरी, परियोजना निदेशक, एनएचएआई