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कानपुर: फिरौती के लिए वकील का अपहरण कर हत्या करने वाले को उम्रकैद, 21 साल पुराने मुकदमे में कोर्ट ने सुनाया फैसला

Sat, 31 Jul 2021 03:00 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

नेहरू नगर निवासी अधिवक्ता प्रशांत कुमार निषाद उर्फ पप्पू 14 अगस्त 2000 की शाम घर से स्कूटर से मंदिर जाने की बात कहकर निकले थे लेकिन नहीं लौटे थे।
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उम्रकैद - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर में फिरौती के लिए वकील का अपहरण कर हत्या करने वाले को अपर जिला जज अष्टम पवन कुमार श्रीवास्तव ने उम्रकैद और 45 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं 21 साल पुराने मामले में अभियुक्त की पत्नी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है।
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नेहरू नगर निवासी अधिवक्ता प्रशांत कुमार निषाद उर्फ पप्पू 14 अगस्त 2000 की शाम घर से स्कूटर से मंदिर जाने की बात कहकर निकले थे लेकिन नहीं लौटे थे। कन्नौज स्टेशन पर प्रशांत की ट्रेन से कटी लाश मिली थी। प्रशांत के पिता प्रेमचंद्र ने 19 अगस्त को नजीराबाद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

14 अगस्त की रात को दो लोगों ने प्रशांत के स्कूटर पर बिल्हौर निवासी राजीव तिवारी और स्वतंत्र कुमार सिंह उर्फ टिंकू को बैठकर जाते देखा था। पूछने पर राजीव ने वकील साहब को जरूरी काम से साथ ले जाने की बात कही थी। एडीजीसी अरविंद ढिमरी ने बताया कि राजीव और स्वतंत्र फिरौती की लालच में प्रशांत का अपहरण करके बिल्हौर ले गए फिर 16 अगस्त की रात को कन्नौज के मानीमऊ ले गए और ट्रेन के आगे धक्का देकर हत्या कर दी।
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घटना में राजीव की मां निर्मला देवी और पत्नी अंजना व रामखिलावन ने भी मदद की थी। रामखिलावन को पहले ही बरी किया जा चुका है। मां निर्मला और स्वतंत्र की मुकदमे के दौरान मौत हो चुकी है। अंजना को कोर्ट ने बरी कर दिया जबकि राजीव को हत्या का दोषी मानते हुए सजा सुनाई।

प्रशांत की संपन्नता बन गई हत्या की वजह
प्रशांत के पिता प्रेमचंद्र ने एफआईआर में कहा था कि प्रशांत बेशकीमती पुखराज जड़ी सोने की दो अंगूठी, दो तोले की सोने की जंजीर, सोने के दाने लगी रुद्राक्ष की माला पहनकर घर से निकला था। प्रेमचंद्र ने जब कचहरी जाकर जानकारी की तो पता चला था कि 14 अगस्त की दोपहर राजीव किसी मुकदमे में आत्मसमर्पण करने की बात प्रशांत से करने आया था।

राजीव बड़ा अपराधी है। प्रशांत की सम्पन्नता देखकर ही उसने अपहरण कर फिरौती वसूलने की योजना बनाई होगी लेकिन सफल न होने पर लूटपाट कर प्रशांत की हत्या कर दी। घटना से आक्रोशित अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य बहिष्कार भी किया था।
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