कानपुर में वकील की गिरफ्तारी और उनकी पत्नी को रात भर थाने में बैठाने की सूचना पर शनिवार सुबह से शुरू हुआ वकीलों का हंगामा शाम तक चलता रहा। पुलिस कमिश्रर कार्यालय के बाहर वकील धरने पर बैठ गए। लगभग सात घंटे तक चले हंगामे के बाद बार पदाधिकारियों और पुलिस अफसरों के बीच हुई वार्ता सफल हुई और धरना खत्म हो सका।
लॉयर्स एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष और उनके भाई की गिरफ्तारी की सूचना मिलने पर सुबह बार एसोसिएशन गेट पर अधिवक्ताओं का जमावड़ा लगने लगा। अधिवक्ता की पत्नी को भी रात भर थाने में बैठाए रखने की बात सामने आई तो हंगामा और नारेबाजी शुरू हो गई। इसी बीच बार व लॉयर्स एसोसिएशन ने संयुक्त रूप से न्यायिक कार्य बहिष्कार की घोषणा कर दी। इसके बाद बार एसोसिएशन के महामंत्री आदित्य सिंह के नेतृत्व में वकीलों का एक गुट पुलिस कमिश्रर कार्यालय पहुंच गया और नारेबाजी शुरू कर दी।
कमिश्रर ने वार्ता के लिए बुलाया लेकिन अधिवक्ता कमिश्रर सेे बाहर आकर उनकी समस्याएं सुनने की मांग करने लगे। कमिश्रर के बाहर न आने पर अधिवक्ता कार्यालय के बाहर ही धरने पर बैठ गए। अधिवक्ता एकता जिंदाबाद और पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद के नारे लगने लगे। एक-एक कर नेताओं ने भाषणबाजी शुरू दी। वकीलों की मांगे माने जाने के बाद दोपहर लगभग 12 बजे से शुरू हुआ धरना शाम लगभग 6 बजे खत्म हो सका।
डीसीपी तीन दिन में देंगे जांच रिपोर्ट, तब बनेगी रणनीति
पुलिस ने वकील के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज किया है जबकि वकील का कहना है कि पीडि़त ही उनकी नाबालिग बेेटी से छेड़छाड़़ कर रहा था। अपहरण की बात सही है या गलत इसकी जांच डीसीपी को सौंपी गई है। तीन दिन में जांच रिपोर्ट आने के बाद वकील आगे की रणनीति तय करेंगे।
बार एसोसिएशन के महामंत्री आदित्य सिंह ने बताया कि पीडि़त के घरवालों ने अपहरण, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है जबकि अधिवक्ता ब्रजनारायण ने नाबालिग को उनकी बेटी से छेड़छाड़ करते पकड़ा था और उसके घरवालों को फोन कर नाबालिग को ले जाने और दोबारा ऐसी हरकत न करने की हिदायत दी थी। अपहरण का कोई मामला नहीं था। बिना जांच-पड़ताल किए अपहरण की धारा में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। रात में ही पुलिस घर में धावा बोलकर वकील के साथ उनकी पत्नी व परिवार के अन्य लोगों को पकड़कर थाने ले आई। वकील की पत्नी को भी रातभर थाने में रखा और प्रताडि़त किया। पुलिस की इस तानाशाही के खिलाफ वकील उग्र हुए और मांगे न माने जाने पर धरना दिया। पुलिस कमिश्रर से वार्ता हो गई है।
डीसीपी आशीष श्रीवास्तव को जांंच सौंपी गई है। तीन दिन में जांच रिपोर्ट पुलिस कमिश्रर को दी जाएगी। जांच होने तक बिठूर थाना प्रभारी को कार्यमुक्त कर दिया गया है। अधिवक्ता ब्रजनारायण की ओर से दी गई तहरीर पर भी रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। पिछले कुछ महीनों में वकीलों के खिलाफ जितनी भी एफआईआर दर्ज की गई हैं उसकी सूची बार व लॉयर्स एसोसिएशन को सौंपी जाएगी जिसकी संस्था अपने स्तर से जांच करेगी। संस्था और पुलिस अफसरों के बीच वार्ता के बाद ही इनमें पुलिस आगे कोई कार्रवाई करेगी।