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कुशाग्र को इंसाफ: ट्यूशन टीचर रचिता…प्रेमी प्रभात और साथी को उम्रकैद, 30 लाख की फिरौती के लिए घोंटा था गला

Thu, 22 Jan 2026 03:35 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: कानपुर की एडीजे-11 कोर्ट ने छात्र कुशाग्र की हत्या के मामले में ट्यूशन टीचर रचिता वत्स, उसके प्रेमी और एक अन्य साथी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। 2023 में 30 लाख की फिरौती के लिए आरोपियों ने छात्र का अपहरण कर हत्या कर दी थी।
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तीनों आरोपियों को उम्रकैद - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर में ढाई साल पहले रायपुरवा में 16 साल के हाईस्कूल के छात्र की अपहरण के बाद गला घोंटकर की गई थी। मामले में तीन दोषियों को अपर जिला जज 11 सुभाष सिंह ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। हत्या की दोषी कुशाग्र की पूर्व ट्यूशन टीचर रचिता वत्स, उसके प्रेमी प्रभात शुक्ला और साथी शिवा गुप्ता पर कोर्ट ने भारी जुर्माना भी लगाया है।

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रायपुरवा स्थित भगवती विला अपार्टमेंट में रहने वाले कुशाग्र कनोडिया की 30 अक्तूबर 2023 को कोचिंग जाते समय अपहरण कर हत्या कर दी गई थी। हत्यारों ने 30 लाख रुपए फिरौती की मांग भी की थी। फिरौती का पत्र डालने अपार्टमेंट में आए युवक की स्कूटी को अपार्टमेंट के चौकीदार ने पहचान लिया था। इसके बाद पुलिस और परिजनों ने तत्परता दिखाई।

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कोर्ट में फैसला सुनने पहुंचे कुशाग्र के मां-बाप - फोटो : amar ujala
सीसीटीवी फुटेज महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हुए
उसी रात कुशाग्र तक तो पहुंच गए, लेकिन अपहरणकर्ताओं ने तब तक कुशाग्र की गला घोंटकर हत्या कर दी थी। एडीजीसी भास्कर मिश्रा ने बताया कि इस मुकदमे में अभियोजन की ओर से 14 गवाह कोर्ट में पेश किए गए। अभियुक्तों की कॉल डिटेल रिपोर्ट और घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हुए।

परिवार के साथ कुशाग्र (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala
हत्यारों के लिए फांसी की मांग
सभी के आधार पर कोर्ट ने रचिता, प्रभात और शिवा को 20 जनवरी को अपहरण और हत्या का दोषी करार दे दिया था। गुरुवार 22 जनवरी को सजा के बिंदु पर सुनवाई होनी थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से डीजीसी दिलीप अवस्थी, एडीजीसी भास्कर मिश्रा और कुशाग्र की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता कमलेश पाठक सभी ने एक स्वर में इसे वीभत्स हत्या बताते हुए हत्यारों के लिए फांसी की मांग की।
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रोते बिलखते कुशाग्र के पिता - फोटो : amar ujala
कोई आपराधिक इतिहास न होने जैसे तर्क रखे
वहीं, रचिता के अधिवक्ता राजेश्वर तिवारी, प्रभात के अधिवक्ता ओम नारायण द्विवेदी और शिवा के अधिवक्ता मनीष मिश्रा ने अभियुक्तों का कोई आपराधिक इतिहास न होने, गरीब होने, उनकी पैरवी तक करने वाला कोई न होने जैसे तर्क रखते हुए सजा में रहम की गुहार लगाई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया।
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