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Kanpur Kidney Racket: 10 लाख कैश के साथ परवेज गिरफ्तार, अवैध ट्रांसप्लांट में लखनऊ के बड़े सर्जन का कनेक्शन

Wed, 08 Apr 2026 05:46 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: कानपुर पुलिस ने किडनी कांड के आरोपी परवेज सैफी को 10 लाख रुपये नकद के साथ गिरफ्तार किया है, जो डॉक्टरों की टीम को गाड़ियां मुहैया कराता था। जांच में सामने आया है कि ट्रांसप्लांट की जटिल सर्जरी में लखनऊ के एक बड़े विशेषज्ञ सर्जन का हाथ हो सकता है, जिसके साक्ष्य पुलिस को मिले हैं।
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परवेज सैफी, आहूजा हॉस्पिटल और बरामद सामान - फोटो : Amar ujala
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विस्तार
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कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट मामले में डॉ. अफजल, डॉ. रोहित के साथी परवेज सैफी को मंगलवार देर रात पुलिस ने रावतपुर क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से 10 लाख रुपये बरामद हुए हैं। पुलिस ने उसके एक और साथी को भी हिरासत में लिया है। डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी के मुताबिक, परवेज सैफी डॉ. अफजल, डॉ. रोहित और एनसीआर के अन्य स्टाफ को कानपुर लाने का कार्य करता था। वह टीम को कार मुहैया करवाता था।

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उसके बारे में जेल गए कुलदीप और राजेश कुमार ने भी जानकारी दी थी। इससे पहले जेल गए शिवम अग्रवाल के मोबाइल से पुलिस को डॉ. अफजल और परवेज का वीडियो मिला था, जिसमें दोनों 500-500 की गड्डियों पर लेटे हुए नजर आ रहे थे। ये रुपये किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाली मुजफ्फरनगर की पारुल द्वारा दिए गए थे। डॉ. अफजल ने 22 लाख रुपये लिए थे, इसमें से 10 लाख परवेज ने लिए थे। डीसीपी ने बताया कि परवेज अधिवक्ताओं के साथ सरेंडर करने की तैयारी में था, लेकिन उसको सर्विलांस से दबोच लिया गया।

किडनी ट्रांसप्लांट में लखनऊ के बड़े सर्जन का मिला कनेक्शन
किडनी ट्रांसप्लांट में लखनऊ के बड़े सर्जन का भी जांच टीम को कनेक्शन मिला है। वह किडनी ट्रांसप्लांट का विशेषज्ञ होने के साथ ही बड़े अस्पताल से जुड़ा है। पुलिस को उसकी डॉ. रोहित के साथ जान पहचान होने के कुछ साक्ष्य मिले हैं, जिससे उन पर शक की सुई घूम रही है। पुलिस सर्जन से पूछताछ कर सकती है। शहर में हुए किडनी ट्रांसप्लांट में पुलिस को आधे से अधिक आरोपियों के नाम मिल गए हैं।

पुलिस की गिरफ्त में आरोपी - फोटो : amar ujala
पुलिस इन लोगों को भेज चुकी है जेल
उनकी तलाश में टीमें अलग-अलग शहरों में दबिश दे रही हैं। केशवपुरम स्थित आहूजा हॉस्पिटल और मसवानपुर के मेडिलाइफ हॉस्पिटल में हुए ट्रांसप्लांट में डॉ. रोहित, डॉ. अजफल, ओटी असिस्टेंट मुदस्सर अली सिद्दीकी, कुलदीप सिंह राघव, राजेश कुमार समेत अन्य शामिल थे। पुलिस आहूजा हॉस्पिटल संचालक डॉ. सुरजीत सिंह, डॉ. प्रीति आहूजा, शिवम अग्रवाल, राजेश कुमार, राम प्रकाश कुशवाहा, नरेंद्र सिंह, कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार तोमर को जेल भेज चुकी है।

यह बात अधिकारियों को हजम नहीं हो रही
मुदस्सर अली, डॉ. रोहित, डॉ. अमित, डॉ. अफजल, डॉ. वैभव, परवेज सैफी आदि की तलाश है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि किडनी ट्रांसप्लांट के आरोपी विशेषज्ञ नहीं थे। यह सर्जरी ओटी मैनेजर, ओटी टेक्नीशियन और झोलाझाप ने की है। यह बात अधिकारियों को हजम नहीं हो रही है। पुलिस अधिकारियों ने मुजफ्फरनगर की पारुल तोमर की हालत के संबंध में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज और राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल लखनऊ के विशेषज्ञाें से बातचीत की।  उनसे ट्रांसप्लांट के तरीके और सर्जरी की जानकारी जुटाई।

आरोपी शिवम - फोटो : amar ujala
टीमों को और साक्ष्य जुटाने के लिए कहा गया
विशेषज्ञों ने उन्हें बताया है कि यह सर्जरी किसी जानकार ने की है ट्रांसप्लांट ठीक हुआ है। किसी तरह का संक्रमण नहीं मिला है। किडनी ट्रांसप्लांट में लगभग आठ घंटे का समय लगता है। पहले डोनर का ऑपरेशन एक से दो घंटे में होता है। उसकी किडनी सुरक्षित की जाती है। इसके बाद गुर्दा रोगी को किडनी लगाने की प्रक्रिया होती है। इसमें छह घंटे से अधिक समय लगता है। इतनी लंबी सर्जरी ओटी मैनेजर या ओटी असिस्टेंट के बस की बात नहीं है।

लखनऊ पुलिस का ले रहे सहयोग
पुलिस को लखनऊ के विशेषज्ञ के बारे में कुछ साक्ष्य मिले हैं। टीमों को और साक्ष्य जुटाने के लिए कहा गया है। डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम के मुताबिक रविवार की रात लगभग तीन बजे आहूजा हॉस्पिटल से दो कारें निकली थीं। किया कैरेंस कार गाजियाबाद के वैशाली गई जिसमें मुदस्सर अली सिद्दीकी, कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार सवार थे। दूसरी अर्टिगा कार लखनऊ के ट्रांसपोर्टनगर तक गई। उसमें पांच लोग सवार थे।

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भूपेंद्र स्वयं को डॉक्टर बताता है

उनकी जानकारी के लिए लखनऊ कमिश्नरेट से सहयोग लिया जा रहा है।  कार में डॉ. रोहित, डॉ. अफजाल, परवेज सैफी के अलावा दो अन्य लोगों के होने के साक्ष्य मिले हैं। उनकी जानकारी जुटाई जा रही है। लखनऊ पुलिस सीसीटीवी कैमरों को खंगाल रही है। स्वरूपनगर के नर्सिंगहोम में कार्य करने वाले टेक्नीशियन भूपेंद्र का भी लखनऊ के विशेषज्ञ के यहां आने जाने की जानकारी हुई है। भूपेंद्र स्वयं को डॉक्टर बताता है।
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हैलट में किडनी डोनर आयुष चौधरी की जांच करते प्राचार्य डॉ. काला और अन्य - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
किडनी ट्रांसप्लांट मामले में लखनऊ और दिल्ली के बड़े अस्पतालों के डॉक्टरों का नाम सामने आया है। उनकी डॉ. रोहित से जान पहचान है। पुलिस की टीमें और साक्ष्य जुटा रही हैं। जल्द ही उनसे पूछताछ की जाएगी।  -एसएम कासिम आबिदी, डीसीपी पश्चिम, कानपुर
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