किडनी ट्रांसप्लांट में लखनऊ के बड़े सर्जन का मिला कनेक्शन
किडनी ट्रांसप्लांट में लखनऊ के बड़े सर्जन का भी जांच टीम को कनेक्शन मिला है। वह किडनी ट्रांसप्लांट का विशेषज्ञ होने के साथ ही बड़े अस्पताल से जुड़ा है। पुलिस को उसकी डॉ. रोहित के साथ जान पहचान होने के कुछ साक्ष्य मिले हैं, जिससे उन पर शक की सुई घूम रही है। पुलिस सर्जन से पूछताछ कर सकती है। शहर में हुए किडनी ट्रांसप्लांट में पुलिस को आधे से अधिक आरोपियों के नाम मिल गए हैं।
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : amar ujala
पुलिस इन लोगों को भेज चुकी है जेल
उनकी तलाश में टीमें अलग-अलग शहरों में दबिश दे रही हैं। केशवपुरम स्थित आहूजा हॉस्पिटल और मसवानपुर के मेडिलाइफ हॉस्पिटल में हुए ट्रांसप्लांट में डॉ. रोहित, डॉ. अजफल, ओटी असिस्टेंट मुदस्सर अली सिद्दीकी, कुलदीप सिंह राघव, राजेश कुमार समेत अन्य शामिल थे। पुलिस आहूजा हॉस्पिटल संचालक डॉ. सुरजीत सिंह, डॉ. प्रीति आहूजा, शिवम अग्रवाल, राजेश कुमार, राम प्रकाश कुशवाहा, नरेंद्र सिंह, कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार तोमर को जेल भेज चुकी है।
यह बात अधिकारियों को हजम नहीं हो रही
मुदस्सर अली, डॉ. रोहित, डॉ. अमित, डॉ. अफजल, डॉ. वैभव, परवेज सैफी आदि की तलाश है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि किडनी ट्रांसप्लांट के आरोपी विशेषज्ञ नहीं थे। यह सर्जरी ओटी मैनेजर, ओटी टेक्नीशियन और झोलाझाप ने की है। यह बात अधिकारियों को हजम नहीं हो रही है। पुलिस अधिकारियों ने मुजफ्फरनगर की पारुल तोमर की हालत के संबंध में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज और राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल लखनऊ के विशेषज्ञाें से बातचीत की। उनसे ट्रांसप्लांट के तरीके और सर्जरी की जानकारी जुटाई।
टीमों को और साक्ष्य जुटाने के लिए कहा गया
विशेषज्ञों ने उन्हें बताया है कि यह सर्जरी किसी जानकार ने की है ट्रांसप्लांट ठीक हुआ है। किसी तरह का संक्रमण नहीं मिला है। किडनी ट्रांसप्लांट में लगभग आठ घंटे का समय लगता है। पहले डोनर का ऑपरेशन एक से दो घंटे में होता है। उसकी किडनी सुरक्षित की जाती है। इसके बाद गुर्दा रोगी को किडनी लगाने की प्रक्रिया होती है। इसमें छह घंटे से अधिक समय लगता है। इतनी लंबी सर्जरी ओटी मैनेजर या ओटी असिस्टेंट के बस की बात नहीं है।
लखनऊ पुलिस का ले रहे सहयोग
पुलिस को लखनऊ के विशेषज्ञ के बारे में कुछ साक्ष्य मिले हैं। टीमों को और साक्ष्य जुटाने के लिए कहा गया है। डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम के मुताबिक रविवार की रात लगभग तीन बजे आहूजा हॉस्पिटल से दो कारें निकली थीं। किया कैरेंस कार गाजियाबाद के वैशाली गई जिसमें मुदस्सर अली सिद्दीकी, कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार सवार थे। दूसरी अर्टिगा कार लखनऊ के ट्रांसपोर्टनगर तक गई। उसमें पांच लोग सवार थे।
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भूपेंद्र स्वयं को डॉक्टर बताता है
उनकी जानकारी के लिए लखनऊ कमिश्नरेट से सहयोग लिया जा रहा है। कार में डॉ. रोहित, डॉ. अफजाल, परवेज सैफी के अलावा दो अन्य लोगों के होने के साक्ष्य मिले हैं। उनकी जानकारी जुटाई जा रही है। लखनऊ पुलिस सीसीटीवी कैमरों को खंगाल रही है। स्वरूपनगर के नर्सिंगहोम में कार्य करने वाले टेक्नीशियन भूपेंद्र का भी लखनऊ के विशेषज्ञ के यहां आने जाने की जानकारी हुई है। भूपेंद्र स्वयं को डॉक्टर बताता है।
हैलट में किडनी डोनर आयुष चौधरी की जांच करते प्राचार्य डॉ. काला और अन्य
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किडनी ट्रांसप्लांट मामले में लखनऊ और दिल्ली के बड़े अस्पतालों के डॉक्टरों का नाम सामने आया है। उनकी डॉ. रोहित से जान पहचान है। पुलिस की टीमें और साक्ष्य जुटा रही हैं। जल्द ही उनसे पूछताछ की जाएगी। -एसएम कासिम आबिदी, डीसीपी पश्चिम, कानपुर