किडनी कांड के खुलासे के 11 दिन बाद भी पुलिस डॉ. रोहित और उसके अन्य सहयोगियों को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। पुलिस को मामले में नामजद डॉ. रोहित, वैभव मुद्दगल और अनुराग को तलाश कर रही है। हालांकि, अभी तक उनका कोई सुराग नहीं लगा है। आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए नेपाल भाग सकते हैं। ऐसे में पुलिस की टीमों ने नेपाल बॉर्डर वाले इलाकों में निगरानी तेज कर दी है।
29 मार्च को मसवानपुर इलाके में स्थित आहूजा अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट की सूचना पर पहुंची पुलिस ने 31 मार्च दबिश दी थी। वहां से साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने पनकी कल्याणपुर रोड स्थित प्रिया अस्पताल में छापा मारा जहां पारुल तोमर भर्ती मिलीं। ट्रांसप्लांट कर उनके किडनी लगाई गई थी जबकि आवास-विकास कल्याणपुर के मेडलाइफ अस्पताल में बिहार के बेगूसराय का आयुष चौधरी भर्ती मिला। उसकी किडनी निकाल कर ही पारुल को लगाई गई थी। इसके बाद 31 मार्च को रावतपुर थाने के दरोगा मुकेश कुमार ने रिपोर्ट दर्ज कराई।
पुलिस ने आहूजा अस्पताल के संचालक डॉ. प्रीति आहूजा, उसके पति सुरजीत सिंह आहूजा, शिवम अग्रवाल और मेडलाइफ व प्रिया अस्पताल के संचालकों को गिरफ्तार किया था। आरोपियों से पूछताछ में गाजियाबाद के डॉ. रोहित, डॉ. वैभव मुद्गल, डॉ. अनुराग, अली और अफजल का नाम सामने आया था। इनमें से किसी भी आरोपी को पुलिस अब तक ढूंढ नहीं पाई है। पुलिस ने इनमें से डॉक्टर रोहित, अफजल व ओटी मैनेजर अली पर 25-25 हजार का इनाम घोषित किया है। पुलिस को सूचना मिली है कि आरोपी नेपाल भाग सकते हैं। इसलिए टीमों को लगाकर निगरानी कराई जा रही है।
आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। उनके नेपाल भागने के अंदेशे को देखते हुए टीमें लगाई गईं हैं जाे बॉर्डर के इलाकों वाले क्षेत्रों में निगरानी कर रही हैं। - एसएन कासिम आबिदी, डीसीपी वेस्ट