हत्या के इस मामले में संतोष को जेल भेज दिया गया था। हालांकि मार्च महीने में 1993 में संतोष को जमानत मिल गई थी। समय के साथ धीरे-धीरे सभी मामले दबते गए। इसके बाद संतोष भदौरिया ने करौली बाबा का चोला ओढ़ लिया। लवकुश आश्रम के नाम से तंत्र मंत्र का व्यापार शुरू कर दिया।
बाबा के सभी कृत्यों को नजरअंदाज करती रही पुलिस
दो माह पहले बाबा ने आश्रम के पास स्थित गेस्ट हाउस संचालक नरेंद्र की जमीन पर भी कब्जा करना चाहा था। आरोप है कि संचालक ने जब इसका विरोध किया तो बाबा ने एक युवती को थाने भेजकर संचालक को दुष्कर्म के मामले में फंसाकर जेल भिजवा दिया था। उसके जाते ही बाबा ने जमीन पर कब्जा कर लिया था। खास बात यह है कि इतना कुछ होने के बाद स्थानीय पुलिस बाबा के सभी कृत्यों को नजरअंदाज करती रही। सूत्रों के अनुसार आश्रम का कोई भी काम थाने स्तर पर आसानी से हो जाता है।
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बाबा का शातिर ठग ओम जायसवाल से भी नजदीकी संबंध
जेल में संतोष भदौरिया की मुलाकात ओम जायसवाल उर्फ राजन अहलूवालिया से हुई थी। जो क्लासिक रिजेंसी का मालिक था। ओम जायसवाल लोगों को बैंकों से लोन दिलाने के नाम पर ठगी करता था। ओम के संपर्क में आने के बाद संतोष भदौरिया ठगी करने लगा था। मामले में जूही लाल कॉलोनी निवासी अजय निगम ने संतोष पर किदवईनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी।
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हाल ही में हुआ था एक और विवाद
हाल ही में जरकला निवासी शिवम पाल व घुरूवाखेड़ा निवासी अंकित शर्मा से करौली बाबा की मौजूदगी में उनके गनरों से विवाद हो गया था। इसपर बाबा के गनरों ने फायरिंग करते हुए दहशत फैला दी थी। मामले में पीड़ितों ने बिधनू थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी लेकिन स्थानीय पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की थी।