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ITBP Jawan Mother Case: गैंगरीन की वजह से काटना पड़ा हाथ, कृष्णा और पारस हॉस्पिटल पहुंची पुलिस, जुटाए साक्ष्य

Wed, 27 May 2026 10:36 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: आईटीबीपी जवान की मां का हाथ काटे जाने के मामले में जांच कमेटी ने कृष्णा और पारस अस्पताल में लापरवाही की पुष्टि की है। रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टरों ने समय रहते वस्कुलर सर्जन की सलाह नहीं ली। पुलिस अब दस्तावेजों और सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है।
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आईटीबीपी जवान की मां का हाथ कटने का मामला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानपुर में आईटीबीपी जवान विकास सिंह की मां निर्मला देवी के हाथ काटे जाने के मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। मंगलवार शाम पुलिस कृष्णा और पारस हॉस्पिटल पहुंची और वहां से साक्ष्य जुटाए। थाना प्रभारी अमान सिंह ने जांच के लिए दोनों अस्पतालों के प्रबंधन को नोटिस दिया। बुधवार को पुलिस वहां के स्टाफ से पूछताछ कर सकती है।

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फतेहपुर निवासी विकास सिंह ने मां निर्मला देवी को सांस की तकलीफ होने पर 13 मई को कृष्णा हॉस्पिटल के आईसीयू में भर्ती कराया था। आराम न मिलने और हाथ में सूजन आने पर 14 मई को मां को पारस अस्पताल में भर्ती कराया। वहां के डॉक्टरों ने संक्रमण की बात कह 17 मई को हाथ काट दिया। आईटीबीपी जवान ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप पुलिस से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

दोनों अस्पताल जाकर जुटाई जानकारी
उन्होंने 19 मई को पुलिस कमिश्नर से शिकायत की, जिस पर सीएमओ की कमेटी से जांच कराई गई। पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर रेलबाजार पुलिस ने दोनों अस्पतालों के डॉक्टरों पर एफआईआर की। मंगलवार को इंस्पेक्टर अमान सिंह दोनों अस्पताल गए। वहां की जानकारी जुटाई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बुधवार को बीएचटी, सीसीटीवी फुटेज, इलाज का ब्योरा, स्टाफ के बयान लिए जाएंगे।

जांच के लिए भेजा जा सकता है हाथ
निर्मला देवी के कटे हाथ को मंगलवार को एफएसएल लैब में भेजा जाना था लेकिन सीएमओ के पत्र के बिना भेजा नहीं जा सका। बुधवार को पत्र मिलने पर हाथ जांच के लिए भेजा जा सकता है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक सीएमओ से हाथ की जांच के लिए पत्र जारी करने के लिए कहा गया था, लेकिन उनके कार्यालय की ओर से किसी तरह से पत्र नहीं दिया गया।

गैंगरीन की वजह से काटना पड़ा हाथ
कानपुर जांच कमेटी में शामिल डॉक्टरों ने कहा है कि निर्मला के हाथ में गैंगरीन हुआ था, जिसकी वजह से हाथ काटना पड़ा। इसके तीन कारण हैं। एक तो वह ह्रदय रोगी थी और ऐसी स्थिति में ह्रदय में होने वाले क्लॉट कई बार हाथ या पैर की नसों में चले जाते हैं। इससे उस जगह का रक्त प्रवाह रुक जाता है। दूसरा हाथ में कंपार्टमेंट सिंड्रोम के चलते ऐसी स्थिति हुई है।

हाथ का रंग धीरे-धीरे काला-नीला पड़ने लगा था
तीसरा कारण वीगो लगने से आई सूजन और उसके बाद ये रक्त का प्रवाह रुकना भी हो सकता है। परिजन का आरोप है कि इलाज के दौरान कृष्णा और पारस अस्पताल के डॉक्टरों के सामने ही महिला के हाथ का रंग धीरे-धीरे काला-नीला पड़ने लगा था और सूजन लगातार बढ़ रही थी। यह साफ तौर पर गैंग्रीन या गंभीर संक्रमण का संकेत था। डॉक्टरों ने इसे महज एक सामान्य सूजन मानकर टाल दिया।

हाथ का रंग धीरे-धीरे काला-नीला पड़ने लगा था
जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में भी इस बात को लिखा है कि जांच और इलाज के नाम पर दोनों अस्पतालों में डॉक्टर केवल दवाइयां बदलते रहे, लेकिन गंभीर समस्या को नजरअंदाज कर दिया।  जांच कमेटी का कहना है कि समय पर वस्कुलर सर्जन की मदद ली होती तो हाथ काटने की नौबत की संभावना नहीं होती। एसीएमओ डॉ. रमित रस्तोगी ने बताया कि जांच रिपोर्ट में दोनों ही अस्पतालों की ओर से लापरवाही सामने आई है। अगर वे समय रहते सर्जन को दिखा देते, तो शायद महिला का हाथ कटने से बच सकता था।
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निर्मला देवी को का दाहिना हाथ नॉन वॉयबल (अव्यवहार्य) हो चुका था और जान बचाने के लिए तत्काल सर्जरी जरूरी थी। परिजन की लिखित सहमति लेने के बाद 17 मई को सर्जरी कर हाथ काटा गया। पूरी प्रक्रिया मेडिकल प्रोटोकॉल और मानक उपचार प्रक्रियाओं के तहत की गई। हमारी टीम लगातार उनके संपर्क में है। मरीज पारस हेल्थ में भर्ती हैं। उनकी स्थिति स्थिर है और स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है। अस्पताल प्रशासन संबंधित प्रशासनिक और चिकित्सा अधिकारियों द्वारा की जा रही जांच में पूरा सहयोग कर रहा है।  -नितिन सारस्वत, यूनिट हेड सेल्स एंड मार्केटिंग, पारस हेल्थ
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