आवास निर्माण निगम के रिटायर्ड जेई जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव से 95 लाख की ठगी इंटर पास सुल्तानपुर के दीपक सिंह ने आरबीआई के जनरल मैनेजर बनकर की थी। उसके साथ जौनपुर निवासी पत्नी आंचल शामिल थी। नजीराबाद पुलिस और सेंट्रल जोन की साइबर सेल ने मंगलवार को दोनों को जेके मंदिर के नजदीक से गिरफ्तार किया। दोनों के पास से एक्सयूवी कार, आई फोन, लैपटॉप, चेकबुक और अन्य सामान बरामद हुए। आरोपी ने पीड़ित को आरबीआई का फर्जी पत्र भी दिया था।
डीसीपी सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि शारदानगर निवासी जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव 2022 में आवास निर्माण निगम में जेई पद से सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने नौकरी के दौरान कई जगह रकम निवेश की थी। उसी में 28 ऐसी बीमा पॉलिसी थीं जिनकी किस्तें न जमा करने के कारण लैप्स हो गई थीं। गूगल पर आरबीआई की वेबसाइट और टोल फ्री नंबर सर्च किया। उन्हें एक नंबर पर कॉल करने पर उनको आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज ई-मेल करने के लिए कहा गया।
फोन करने वाले ने खुद को आरबीआई का जनरल मैनेजर बताया। उसने रिटायर्ड जेई से कहा कि उनको 2.20 करोड़ रुपये मिलेंगे लेकिन लैप्स पॉलिसी की वजह से उनको रुपये देने पड़ेंगे। जितेंद्र कुमार सिंह ने 2022 से अप्रैल 2026 तक उसके बताए खातों में रुपये जमा किए। अप्रैल में गोरखपुर रहने वाली बेटी उनके घर आईं तब डीसीपी सेंट्रल से मामले की शिकायत की। साइबर सेल के प्रभारी तनुज सिरोही और उनकी टीम ने आरोपी दंपती की जानकारी जुटाई। दोनों को गिरफ्तार किया।
बच्चों की फीस जमा करने के साथ ही कार तक जेई के रुपयों से खरीदी
साइबर सेल के प्रभारी तनुज सिरोही के मुताबिक, दीपक सिंह पहले किसी बीमा कंपनी में कार्य करता था। उसको सारी जानकारी थी। उसने फर्जी वेबसाइट व नंबर तैयार कर ठगी की साजिश रची। वह रिटायर्ड जेई से जब भी चाहता था, रुपये मांगा करता था। उसके बच्चों की स्कूल की फीस, आंचल की एएनएम की पढ़ाई, कपड़े, महंगे शौक उन्हीं की रकम से पूरे हो रहे थे। ठगी के 95 लाख में एक्सयूवी कार, महंगे परफ्यूम और देश में कई जगह की यात्रा की। आरोपी अपने ससुराल में रह रहा था।