कोरोना की दूसरी लहर ने 69 फीसदी बच्चों को मानसिक आघात पहुंचाया है। बच्चे खुद संक्रमित नहीं हुए लेकिन घर परिवार, आस-पड़ोस के लोगों को अस्पताल में भर्ती होता देख या एंबुलेंस के सायरन ने उनके मन में कुठाराघात किया।
आईआईटी के ह्यूमेनिटीज और सोशल साइंस के प्रोफेसर बृजभूषण ने यह शोध किया है। शोध जल्द ही जर्नल फ्रंटियर्स इन साइकोलॉजी के नवीनतम संस्करण में प्रकाशित होगा। प्रो. बृजभूषण ने नौ से 20 साल की उम्र के 412 बच्चों और युवाओं को इस शोध में शामिल किया।
इनमें 226 लड़के और 186 लड़कियां रहीं। इनमें 43 फीसदी शहरी और 57 ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को शामिल किया गया है। इनमें से 89 फीसदी के एक से अधिक भाई-बहन थे और 50 फीसदी बच्चे अपने माता-पिता और दादा-दादी के साथ रह रहे थे। प्रो. बृजभूषण ने बताया कि जुलाई 2021 में बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर अध्ययन किया गया। 68.9 फीसदी किशोर पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस से प्रभावित थे।