बच्चे को सांस लेने में दिक्कत हो तो उसकी सांस की नली की जांच जरूर कराएं। मटर, मूंगफली का दाना, कील आदि अटकी हो तो विशेषज्ञ के पास जाएं। फ्लेक्सिबल ब्रोंकोस्कोपी से सांस की नली में अटकी चीज को तुरंत निकाल दिया जाएगा और बच्चे की जान बच जाएगी। इसमें किसी तरह की चीड़फाड़ की नौबत नहीं आती। यह बात रविवार को सर्वोदयनगर स्थित रीजेंसी हॉस्पिटल में आयोजित कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताई।
बाल चिकित्सा पल्मोनोलॉजी पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के अंतिम दिन विशेषज्ञों ने डॉक्टरों को पुतलों पर ब्रोंकोस्कोपी सिखाई। कार्यशाला में प्रदेश के अलावा हरियाणा, दिल्ली और उत्तराखंड के 50 डॉक्टरों ने शिरकत की। रीजेंसी की वरिष्ठ बालरोग विशेषज्ञ डॉ. रश्मि कपूर ने बताया कि ब्रोंकोस्कोपी से सांस नली में फंसी चीजें निकालने के अलावा कुछ ऐसे संक्रमणों का भी पता चल जाता है जिनसे सांस लेेने में कठिनाई होती है।
फोर्टिस हॉस्पिटल के डॉ. किशन चुघ और गुरुग्राम से आए डॉ. पल्लब चटर्जी ने बताया कि बच्चे अक्सर मटर के दाने, कंचे, पत्थर के टुकड़े आदि मुंह में भर लेते हैं, अक्सर ये सांस की नली में अटक जाते हैं। इससे बच्चों में सांस लेने में दिक्कत होने का लक्षण उभर आता है।
उन्होंने बताया कि देश में बहुत कम स्थानों पर ब्रोंकोस्कोपी होती है। रीजेंसी में इसकी सुविधा उपलब्ध है। यहां तीन सौ से अधिक बच्चों की सांस की नली से चीजें निकाली जा चुकी हैं। कार्यशाला का संचालन डॉ. तरुण चंद्रा और डॉ. सीपी सिंह ने किया।
बच्चों के फेफड़ों को बीमारियों का खतरा
कार्यशाला के पहले दिन शनिवार को डॉ. किशन चुघ ने बताया कि वायरल संक्रमण की लहर से बच्चों के फेफड़ों में बीमारियों का खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने रोग से बचाव के तरीकों को बताया। इसी तरह डॉ. पल्लब चटर्जी ने तपेदिक प्रबंधन पर चर्चा की और विभिन्न नैदानिक प्रक्रियाओं के बारे में बताया।
एडवाइजरी
- नौ महीने से दो साल तक के बच्चों में सामने पड़ी चीज मुंह में डालने की आदत होती है, निगरानी करें।
- बच्चों के आगे मटर, चना आदि चीजें न रखें।
- बच्चों को ऐसे खिलौने न दें जो उनके मुंह में चले जाएं।
- कुछ खा लेने पर बच्चे के मुंह में उंगली डालकर निकालने की कोशिश न करें।
- बच्चे को सांस लेने में दिक्कत हो तो डॉक्टर को दिखाएं।