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कानपुर: डिजिटल डीएल की राह का रोड़ा, 300 से अधिक आवेदन लटके, दो महीने से अप्रूवल ठप, चक्कर काट रहे लाइसेंसधारक

Sun, 04 Oct 2026 09:44 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: कानपुर आरटीओ में पुराने मैनुअल ड्राइविंग लाइसेंस को डिजिटल व ऑनलाइन रिकॉर्ड से जोड़ने की प्रक्रिया मुख्यालय स्तर पर अटकी अप्रूवल व्यवस्था के कारण ठप पड़ गई है। जून 2026 में जारी नए दिशा-निर्देशों के तहत अप्रूवल का अधिकार स्थानीय आरटीओ से हटाकर लखनऊ मुख्यालय को दे दिया गया था। 
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आरटीओ कानपुर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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  • केस एक- अगस्त से अटका है अप्रूवल

देवी सहाय नगर के रहने वाले दीपक कनौजिया ने अगस्त माह में ड्राइविंग लाइसेंस को ऑनलाइन करने के लिए प्रार्थना पत्र के साथ सभी जरूरी कागजातों को कार्यालय में जमा किया था लेकिन अभी तक मुख्यालय से अप्रूवल नहीं मिल सका है।

  • केस दो- नहीं बन पा रहा नया लाइसेंस

गोविन्द नगर निवासी रोहित खन्ना के लाइसेंस की समय सीमा जून में समाप्त हो गई थी। दोबारा बनवाने के लिए मैनुअल लाइसेंस को ऑनलाइन फीड कराने के लिए अगस्त माह में आवेदन किया था। अभी तक अप्रूवल न मिलने से नया लाइसेंस नहीं बन सका है।

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कानपुर में पुराने मैनुअल ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) को ऑनलाइन रिकॉर्ड और स्मार्ट कार्ड व्यवस्था से जोड़ने की परिवहन विभाग की प्रक्रिया वाहन लाइसेंसधारकों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। आरटीओ कार्यालय में पुराने लाइसेंसों का डेटा ऑनलाइन फीड किया जा रहा है, लेकिन अंतिम अप्रूवल का अधिकार मुख्यालय को दिए जाने के बाद करीब दो महीने से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है।

अंतिम अप्रूवल की व्यवस्था बदल दी गई थी
अब तक 300 से ज्यादा लाइसेंसधारकों के रिकॉर्ड फीड होने के बावजूद मंजूरी नहीं मिली है। इसके चलते रोजाना 10 से 15 लोग समस्या लेकर आरटीओ कार्यालय पहुंच रहे हैं। जून 2026 में जारी नए दिशा-निर्देशों के बाद बैकलॉग डीएल के अंतिम अप्रूवल की व्यवस्था बदल दी गई थी। पहले डेटा फीडिंग के साथ अप्रूवल भी स्थानीय आरटीओ स्तर पर हो जाता था।

मुख्यालय से होगा अंतिम अप्रूवल
अब स्थानीय कार्यालय की भूमिका रिकॉर्ड फीड करने तक सीमित है और अंतिम मंजूरी मुख्यालय स्तर से होनी है। अगस्त से स्थानीय स्तर पर बैकलॉग डीएल का अप्रूवल बंद है। स्थिति यह है कि लाइसेंसधारक स्थानीय कार्यालय में प्रक्रिया पूरी कराने के बाद भी उसी स्तर से समाधान नहीं पा रहे हैं। कर्मचारियों की ओर से उन्हें बताया जा रहा है कि रिकॉर्ड मुख्यालय भेजा जा चुका है और अंतिम अप्रूवल वहीं से होगा।

बीमा क्लेम स्वत: खारिज नहीं होता
यानी आवेदन स्थानीय स्तर पर, फीडिंग स्थानीय स्तर पर, लेकिन मंजूरी के लिए आवेदक की फाइल मुख्यालय के भरोसे है। दुर्घटना की स्थिति में बीमा दावे को लेकर भी कुछ लाइसेंसधारक चिंतित हैं। हालांकि, केवल ऑनलाइन रिकॉर्ड लंबित होने से बीमा क्लेम स्वत: खारिज नहीं होता। क्लेम का निर्णय संबंधित पॉलिसी की शर्तों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर बीमा कंपनी करती है।

सिर्फ लाइसेंस के अप्रूवल की जरूरत
आरआई (प्राविधिक) संतोष कुमार ने बताया कि अब तक 300 से अधिक बैकलॉग डीएल का डाटा ऑनलाइन फीड किया जा चुका है। सिर्फ लाइसेंस के अप्रूवल की जरूरत है। डेटा फीडिंग के बाद भी अंतिम मंजूरी न मिलने से रिकॉर्ड ऑनलाइन व्यवस्था में लंबित दिखाई दे रहे हैं। आवेदक जानकारी और समाधान के लिए लगातार कार्यालय पहुंच रहे हैं।
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व्यवस्था बदली, लेकिन बैकलॉग का रास्ता साफ नहीं
पुराने मैनुअल लाइसेंस को डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ने का उद्देश्य लाइसेंस की जानकारी को ऑनलाइन उपलब्ध कराना और सत्यापन को आसान बनाना है, लेकिन अप्रूवल की जिम्मेदारी स्थानीय कार्यालय से हटाकर मुख्यालय स्तर पर किए जाने के बाद बैकलॉग मामलों में अड़चन पैदा हो गई है। स्थानीय स्तर पर कर्मचारी रिकॉर्ड फीड कर रहे हैं, लेकिन अंतिम चरण पर पहुंचकर आवेदन अटक रहे हैं।
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