इसी आदेश के खिलाफ रमिंदर ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।तर्क रखा कि विवाद दीवानी प्रकृति का है और सिर्फ दबाव बनाने के लिए तीन साल बाद झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई गई। कोर्ट ने माना कि समिति की सदस्यता और प्रबंधन से संबंधित दीवानी विवाद है।
दीवानी विवाद को आपराधिक बनाकर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रथम की अदालत में लंबित आपराधिक कार्रवाई को रद्द कर दिया।