वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम चिड़ियाघर पहुंची
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद भी मौत न थमने पर चिड़ियाघर प्रशासन ने आरवीआरआई के वैज्ञानिकों को बुलाया। मंगलवार को सुबह 11 बजे वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एम. करीकलन, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश कुमार और तकनीशियन आदर्श कुमार चिड़ियाघर पहुंचे।
वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम चिड़ियाघर पहुंची
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उन्होंने सबसे पहले हिरण के बाड़े का निरीक्षण किया। विशेषज्ञों ने प्रारंभिक जांच में संक्रमण को हीमोप्रोटोजोआ से संबंधित बताया है। संक्रमण की रोकथाम के लिए टीम ने चिड़ियाघर के पशु चिकित्सकों को उपचार और दवा संबंधी परामर्श दिया। साथ ही हिरणों के नमूने भी जांच के लिए गए हैं। वहीं, चिड़ियाघर प्रशासन बाड़े में चूना और दवाओं का छिड़काव कर रहा है। अब आरवीआरआई की जांच रिपोर्ट से साफ होगा कि हिरणों में संक्रमण की वास्तविक वजह क्या है?
एक ही बाड़े में 87 से अधिक हिरण
एक ही बाड़े में काले हिरणों की संख्या 87 से अधिक है। जगह की कमी के चलते सभी हिरणों को एक ही बाड़े में रखा गया है। भारी बारिश के बाद चिड़ियाघर में काले हिरणों की मौत लगातार जारी है। पहले वे सुस्त पड़ रहे फिर भोजन कम करते हैं और तीन से चार दिन बाद ही अचानक चलते-फिरते जमीन पर गिर जाते हैं। इसके बाद मौत हो जाती है। बाड़े में हिरणों की संख्या ज्यादा होने से संक्रमण फैलने का खतरा और बढ़ गया है। अगस्त महीने में मल की जांच में हिरणों में परजीवी यानी पेट के कीड़े भी मिले थे। डी-वॉर्मिंग की दवाओं का अपेक्षित असर नहीं होने के बाद अलग घोल तैयार कर उपचार किया गया था जिसके बाद कुछ सुधार दिखाई दिया था।
आरवीआरआई के विशेषज्ञों ने बाड़े में जाकर जांच की जिसमें उन्होंने हीमोप्रोटोजोआ संक्रमण होना बताया है। उन्होंने उपचार और दवा संबंधी परामर्श दिया है। जल्द ही जांच रिपोर्ट में कारण भी स्पष्ट पता चल जाएगा। - डॉ. कन्हैया पटेल, निदेशक चिड़ियाघर