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UP: आचमन योग्य नहीं गंगाजल, पानी में नाइट्राइट मिलने की पुष्टि, बायोरेमेडिशएन के नाम पर हो रही खानापूरी

Thu, 12 Jun 2025 02:32 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: जलकल विभाग ने भैरोघाट पंपिंग स्टेशन से कच्चे पानी की छह जून को जांच कराई, तो पता चला कि गंगाजल में नाइट्राइट 0.03 मिलीग्राम प्रति लीटर है। नौ जून को जांच की गई तो इसमें कुछ सुधार हुआ और मात्रा 0.01 मिलीग्राम प्रति लीटर मिली।
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रानीघाट पर गंगा में गिर रहा है नाला - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर शहर से निकली गंगा नदी का जल आचमन योग्य नहीं है। इसमें गिर रहे नालों की वजह से पानी में नाइट्राइट की पुष्टि हुई है। जलकल विभाग की जांच में यह खुलासा हुआ। कच्चा पानी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। गंदगी और जलकुंभी आने की वजह से पानी का रंग ब्राउनिश ग्रीन हो गया है। प्रदूषित पानी को शोधित करने में जलकल विभाग का रसायनों पर खर्च डेढ़ गुना बढ़ गया है।

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जलकल विभाग भैरोघाट पंपिंग स्टेशन के माध्यम से रोजाना गंगा से 20 करोड़ लीटर कच्चा पानी बेनाझाबर वाटर वर्क्स के सेटेलिक टैंकों में पहुंचाता है। यहां लोअर गंगा केनाल से भी रोजाना पांच करोड़ लीटर कच्चा पानी भी आता है। बेनाझाबर वाटर वर्क्स में 25 करोड़ लीटर पानी को शोधित कर स्वरूपनगर, आर्यनगर, ग्वालटोली, खलासीलाइन, सूटरगंज, चमनगंज, हरवंशमोहाल समेत 67 वार्डों में आपूर्ति की जाती है।

गंगा में जाता गंदा पानी - फोटो : amar ujala
गंगा जल में नाइट्राइट होना ही नहीं चाहिए
जलकल विभाग ने भैरोघाट पंपिंग स्टेशन से कच्चे पानी की छह जून को जांच कराई, तो पता चला कि गंगाजल में नाइट्राइट 0.03 मिलीग्राम प्रति लीटर है। नौ जून को जांच की गई तो इसमें कुछ सुधार हुआ और मात्रा 0.01 मिलीग्राम प्रति लीटर मिली। 22 मई को नाइट्राइट 0.015 और 24 मई को 0.035 मिलीग्राम प्रति लीटर मिलने की पुष्टि हुई थी। मानक के अनुसार गंगा जल में नाइट्राइट होना ही नहीं चाहिए।

गोलाघाट पर गंगा में जाता नाले का गंदा पानी - फोटो : amar ujala
स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है नाइट्राइट
जलकल विभाग की सेवानिवृत्त मुख्य जल विश्लेषक अमिता बाजपेई ने बताया कि गंगाजल में नाइट्राइट मिलने की वजह सीवरेज की गंदगी भी हो सकती है। वहीं, अन्य जानकारों के अनुसार गंगाजल में नाइट्राइट मिलने से पानी में सीवर लाइन की गंदगी मिलने की पुष्टि होती है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

अस्सी घाट के पास गंगा में जाता सीवर का पानी - फोटो : अमर उजाला
परमिया, रानी घाट नाले से गंगा में जा रहा गंदा पानी
बुधवार को गंगा का जलस्तर 357.3 फीट रह गया, जो पांच जून को 357.4 फीट था। जलस्तर में लगातार गिरावट के साथ ही पानी में गंदगी बढ़ती जा रही है। इसकी प्रमुख वजह बैराज से भैरोघाट पंपिंग स्टेशन के बीच गिर रहे परमिया और रानी घाट नाले हैं। दोनों नालों से रोजाना तीन करोड़ लीटर से ज्यादा गंदा पानी गंगा में जाता है। रानी घाट से करीब 700 मीटर दूर भैरोघाट पंपिंग स्टेशन है। रानीघाट और इस पंपिंग स्टेशन के बीच कटरी में बसी सरजूपुरवा बस्ती की गंदगी भी सीधे नदी में बहाई जाती है।

गंगा में जाता सीवर का पानी - फोटो : amar ujala
बायोरेमेडिएशन के नाम पर हो रही खानापूरी
एनजीटी के निर्देश पर नगर निगम गंगा में गिर रहे परमिया, रानीघाट, गोलाघाट, मेस्कर घाट, डबका घाट समेत छह नालों और पांडु नदी में गिर रहे रफाका समेत अन्य नालों की गंदगी को बायोरेमेडिएशन कराने का दावा कर रहा है। इस मद में सालभर में करीब साढ़े चार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन बायोरेमेडिएशन के नाम पर खानापूरी हो रही है। नालों से गंदगी गंगा में जा रही है।
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परमट में गंगा में जाता नाले का गंदा पानी - फोटो : amar ujala
गंगा से लिए जा रहे कच्चे पानी को बेनाझाबर वाटर वर्क्स में शोधित किया जाता है। कच्चे पानी में गंदगी बढ़ गई है। इसे शुद्ध करते हुए नाइट्राइट 0.00 मिलीग्राम प्रतिलीटर लाने में फिटकरी और क्लोरीन का खर्च बढ़ गया है। शहरवासियों को शुद्ध पानी की आपूर्ति की जा रही है।  -आनंद कुमार त्रिपाठी, महाप्रबंधक जलकल विभाग
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