गंगा में जाता गंदा पानी
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गंगा जल में नाइट्राइट होना ही नहीं चाहिए
जलकल विभाग ने भैरोघाट पंपिंग स्टेशन से कच्चे पानी की छह जून को जांच कराई, तो पता चला कि गंगाजल में नाइट्राइट 0.03 मिलीग्राम प्रति लीटर है। नौ जून को जांच की गई तो इसमें कुछ सुधार हुआ और मात्रा 0.01 मिलीग्राम प्रति लीटर मिली। 22 मई को नाइट्राइट 0.015 और 24 मई को 0.035 मिलीग्राम प्रति लीटर मिलने की पुष्टि हुई थी। मानक के अनुसार गंगा जल में नाइट्राइट होना ही नहीं चाहिए।
गोलाघाट पर गंगा में जाता नाले का गंदा पानी
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स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है नाइट्राइट
जलकल विभाग की सेवानिवृत्त मुख्य जल विश्लेषक अमिता बाजपेई ने बताया कि गंगाजल में नाइट्राइट मिलने की वजह सीवरेज की गंदगी भी हो सकती है। वहीं, अन्य जानकारों के अनुसार गंगाजल में नाइट्राइट मिलने से पानी में सीवर लाइन की गंदगी मिलने की पुष्टि होती है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
अस्सी घाट के पास गंगा में जाता सीवर का पानी
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परमिया, रानी घाट नाले से गंगा में जा रहा गंदा पानी
बुधवार को गंगा का जलस्तर 357.3 फीट रह गया, जो पांच जून को 357.4 फीट था। जलस्तर में लगातार गिरावट के साथ ही पानी में गंदगी बढ़ती जा रही है। इसकी प्रमुख वजह बैराज से भैरोघाट पंपिंग स्टेशन के बीच गिर रहे परमिया और रानी घाट नाले हैं। दोनों नालों से रोजाना तीन करोड़ लीटर से ज्यादा गंदा पानी गंगा में जाता है। रानी घाट से करीब 700 मीटर दूर भैरोघाट पंपिंग स्टेशन है। रानीघाट और इस पंपिंग स्टेशन के बीच कटरी में बसी सरजूपुरवा बस्ती की गंदगी भी सीधे नदी में बहाई जाती है।
गंगा में जाता सीवर का पानी
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बायोरेमेडिएशन के नाम पर हो रही खानापूरी
एनजीटी के निर्देश पर नगर निगम गंगा में गिर रहे परमिया, रानीघाट, गोलाघाट, मेस्कर घाट, डबका घाट समेत छह नालों और पांडु नदी में गिर रहे रफाका समेत अन्य नालों की गंदगी को बायोरेमेडिएशन कराने का दावा कर रहा है। इस मद में सालभर में करीब साढ़े चार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन बायोरेमेडिएशन के नाम पर खानापूरी हो रही है। नालों से गंदगी गंगा में जा रही है।
परमट में गंगा में जाता नाले का गंदा पानी
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गंगा से लिए जा रहे कच्चे पानी को बेनाझाबर वाटर वर्क्स में शोधित किया जाता है। कच्चे पानी में गंदगी बढ़ गई है। इसे शुद्ध करते हुए नाइट्राइट 0.00 मिलीग्राम प्रतिलीटर लाने में फिटकरी और क्लोरीन का खर्च बढ़ गया है। शहरवासियों को शुद्ध पानी की आपूर्ति की जा रही है। -आनंद कुमार त्रिपाठी, महाप्रबंधक जलकल विभाग