इतिहास का गवाह गांधी भवन हो रहा खंडहर
- फोटो : amar ujala
बदहाली पर आंसू बहा रहा है गांधी भवन
इस भवन में आज भी वह हथकरघा मौजूद है, जिसे गांधीजी ने खुद चलाया था। लेकिन अब यह पूरी तरह से खामोश है। एक समय जहां आत्मनिर्भरता और सादगी का संदेश दिया गया था। आज उसी जगह की दीवारें जर्जर हो चुकी हैं और छतें टपक रही हैं। गांधी भवन, जो कभी एक उद्योग भंडार के रूप में जाना जाता था, अब अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।
इतिहास का गवाह गांधी भवन हो रहा खंडहर
- फोटो : amar ujala
कस्तूरबा गांधी ने अपने हाथों से रोटियां बनाई थीं
नरवल के लोग आज भी उस दौर को याद करते हैं, जब गांधीजी ने इस जगह पर समय बिताया था और कस्तूरबा गांधी ने अपने हाथों से रोटियां बनाई थीं। लेकिन उन्हें डर है कि अगर जल्द ही प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया, तो यह गौरवशाली इतिहास सिर्फ कहानियों में ही सिमट कर रह जाएगा। नरवल के बुजुर्गों के मन में कई सवाल हैं, लेकिन उनका जवाब देने वाला कोई नहीं है।