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UP: देश में पहली बार OPF में बनेंगे पायलटों के एंटी ग्रैविटी सूट, जल्द सैंपल जाएंगे लैब…शुरू होगा फील्ड ट्रायल

Wed, 23 Jul 2025 09:58 AM IST
हिमांशु अवस्थी अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत एंटी ग्रैविटी या जी सूट बनाने के लिए डीआरओडी की रिसर्च लैब डीईबीईएल बंगलूरू से तीन दिन पहले लाइसेंस एग्रीमेंट फॉर ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी मिला है। जल्द ही लड़ाकू विमान उड़ाने वाले पायलटों के लिए इस खास सूट का सैंपल बनाकर लैब को भेजा जाएगा।
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एंटी ग्रैविटी सूट और एमसी बालासुब्रमणियम - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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सुखोई 30, तेजस, हॉक, मिराज और जगुआर लड़ाकू विमानों के पायलटों के लिए कानपुर स्थित ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड (जीआईएल) की इकाई आयुध पैराशूट निर्माणी (ओपीएफ) में एंटी ग्रैविटी सूट बनाए जाएंगे। इस तरह के सूट देश में पहली बार बनेंगे। अभी तक इनका आयात किया जाता था। निर्माणी को लाइसेंस फॉर ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी की मंजूरी मिल गई है। जल्द ही डीआरडीओ की रिसर्च लैब डिफेंस बायो इंजीनियरिंग एंड इलेक्ट्रो मेडिकल लेबोरेटरी (डीईबीईएल) बंगलूरू को सूट का सैंपल तैयार करके भेजा जाएगा।

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इसके बाद इसका ट्रायल शुरू किया जाएगा। दरअसल काम्बैट फ्री फाल सिस्टम में पायलट को ग्रैविटी सूट, नेविगेशन, कम्युनिकेशन डिवाइस, ऑक्सीजन सिस्टम से लैस किया जाता है। लड़ाकू विमान बेहद ऊंचाई पर उड़ते हैं। लड़ाकू पायलटों को तंग मोड़, तेज चढ़ाई और अन्य आक्रामक उड़ान युद्धाभ्यास करते समय अत्यधिक गुरुत्वाकर्षण बल यानी जी-बल का सामना करना पड़ता है। इन परिस्थितियों में रक्त निचले अंगों में जमा हो जाता है, जिससे मस्तिष्क में रक्त की आपूर्ति कम हो जाती है।

पायलट की सुरक्षा और प्रदर्शन में होती है वृद्धि
इसके चलते उन्हें कम दिखना या चक्कर आने के लक्षण होने की संभावना रहती है। इससे बचाव के लिए डीईबीईएल ने पायलट के पेट और निचले अंगों पर नियंत्रित दबाव डालकर इस प्रभाव को कम करने के लिए एंटी-जी सूट विशेष रूप से डिजाइन किया है। यह दबाव महत्वपूर्ण अंगों खासकर मस्तिष्क में रक्त प्रवाह बनाए रखने में मदद करता है, जिससे पायलट की सुरक्षा और प्रदर्शन में वृद्धि होती है। यह सूट आग से भी बचाव करता है। इसकी ब्लैडर प्रणाली पॉलीयूरेथेन-लेपित कपड़े से बनी है, जो रासायनिक क्षरण के प्रति बेहतर प्रतिरोध और लंबी उड़ान में सहायक बनाता है।

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आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत एंटी ग्रैविटी या जी सूट बनाने के लिए डीआरओडी की रिसर्च लैब डीईबीईएल बंगलूरू से तीन दिन पहले लाइसेंस एग्रीमेंट फॉर ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी मिला है। जल्द ही लड़ाकू विमान उड़ाने वाले पायलटों के लिए इस खास सूट का सैंपल बनाकर लैब को भेजा जाएगा। इसके साथ ही फील्ड ट्रायल शुरू होगा। जीआईएल के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। पहली बार देश में ये सूट बनेंगे।  -एमसी बालासुब्रमणियम, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड
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