ड्रैगन फ्रूट की खेती करने वाले संजीव कुमार यादव
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वहीं, भारत सरकार का उपक्रम से कार्यपालक निदेशक के पद से फरवरी में सेवानिवृत्त हुए पतारा ब्लॉक के ककरहिया निवासी संजीव कुमार यादव भूटान में 1200 मेगावाट की जल विद्युत परियोजना में मैनेंजिग डायरेक्टर के पद के दौरान ड्रैगन फ्रूट की खेती करने की प्रेरणा मिली। सेवानिवृत्त के बाद इसकी खेती करने का मन बनाया। जुलाई में गांव ककरहिया की जमीन में तीन बीघे ड्रैगन फ्रूट का बाग लगाया। संजीव बताते हैं कि मेरा प्रयास इच्छुक किसानों को मार्गदर्शन से उनकी आमदनी बढ़ाना है।
चतुरीपुर गांव से रसायन मुक्त हल्दी की खेती दिखाती रश्मि सचान
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दोनो बेंगलुरु में काम कर रहे थे
भीतरगांव ब्लॉक के चतुरीपुर गांव निवासी इंजीनियर दंपति ने वर्ष 2022 में बेंगलुरु में नौकरी छोड़कर अपने पैतृक गांव में रसायन-मुक्त प्राकृतिक खेती अपनाई है। अंकुर सचान सॉफ्टवेयर इंजीनियर व उनकी पत्नी रश्मि सचान मैकेनिकल इंजीनियर हैं। दोनो बेंगलुरु में काम कर रहे थे, कोरोना के दौरान वे अपने पैतृक गांव कानपुर लौट आए और रसायन मुक्त खेती करना शुरू किया। रश्मि बताती है कि सह-फसली विधि से एक साथ कई फसलें हल्दी, अमरूद, पपीता, सब्जियां पालक, मेथी, टमाटर, बैंगन उगा लेते हैं।