92% आने पर भी नाखुश थी
उसने बताया कि शरारती होने के कारण पूर्व में पढ़ाई के दौरान स्कूल के टीचर उसे डांटते थे। भाई का आरोप है कि स्कूल के कुछ टीचर उनकी बहन पर उनका हवाला देते हुए पढ़ाई का दबाव बना रहे थे। इसके चलते बहन दिन-रात पढ़ाई कर रही थी। 92% आने पर वह नाखुश थी। इसी के चलते उसने फंदा लगाकर जान दे दी। मां के अनुसार रोज की तरह गुरुवार दोपहर तीन बजे उन्होंने बेटी को कॉल की, लेकिन फोन नहीं रिसीव हुआ।
शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा
इसके बाद उन्होंने शाम छह बजे बेटी को फोन मिलाया। उस दौरान भी बेटी ने फोन नहीं रिसीव। इस पर बेटे प्रिंस से जाकर बात करने के लिए कहा वह जब कमरे में पहुंचा, तो पंखे के सारे बेटी का शव पंखे के सहारे लटकता हुआ मिला। इसके बाद चीख पुकार मच गई। सूचना पर पनकी पुलिस फॉरेंसिक टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंची और जांच की। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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पता नहीं था- इतना बड़ा कदम उठा लेगी
घटना से स्तब्ध वैशाली के साथी छात्र-छात्राएं पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। उन लोगों ने छात्र की मां से बातचीत की। उन लोगों ने उनका दुख बाटकर ढांढस बंधाया। साथी छात्राओं का कहना था कि उन्हें नहीं पता था कि वैशाली पढ़ाई के दबाव में इतना बड़ा कदम उठा लेगी। घटना से परिजनों और दोस्तों का रो-रोकर बुरा हाल है।