हालत ज्यादा बिगड़ने पर सीएचसी में भर्ती कराया
धीरपुर निवासी शैलेश कुमार ने बताया कि रामआसरे उनके मामा थे और उनके साथ ही रहते थे। वह गांव में ट्यूबवेल के पास झोपड़ी बनाकर खेती-किसानी करते थे। परिवार में उनकी मां सुखरानी और पिता मुन्नीलाल हैं। शैलेश के मुताबिक, कुत्ते के काटने के बाद उन्हें सीएचसी ले जाया गया था, जहां रेबीज का इंजेक्शन भी लगवाया गया। करीब तीन दिन पहले हालत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें सीएचसी में भर्ती कराया गया।
बार-बार बलि देने की बात कह रहे थे
हालत गंभीर होने पर वहां से हैलट रेफर किया गया। परिजनों का कहना है कि हैलट से लौटने के बाद रामआसरे बार-बार काली मां के स्थान पर जाकर बलि देने की बात कह रहे थे। परिवार के लोग उनकी हालत को लेकर चिंतित थे। सोमवार रात अस्पताल से घर लौटने के बाद मंगलवार भोर वह अचानक घर से निकल गए। परिजन कुछ समझ पाते, इससे पहले वह मंदिर के पास पहुंच गए और अपनी जान दे दी।
शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा
शैलेश ने बताया कि जिस कुत्ते ने रामआसरे को काटा था। वह गांव में करीब 10 लोगों को काट चुका था। इनमें सरवन, संत सिंह ठाकुर और शशिपाल समेत अन्य ग्रामीण शामिल थे। बाद में ग्रामीणों ने कुत्ते को मार दिया था। परिजनों का दावा है कि रामआसरे की हालत कुत्ते के काटने के बाद से ही लगातार बिगड़ती गई। बिधनू थाना प्रभारी तेज बहादुर सिंह ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस घटना के कारणों और परिस्थितियों की जांच कर रही है।