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UP: आंत के कैंसर को बढ़ा रहा DKC1 प्रोटीन, इलाज भी करती है बेअसर, प्रो. बुशरा अतीक ने डिकोड किया मैकेनिज्म

Tue, 19 May 2026 03:17 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: आईआईटी कानपुर की प्रो. बुशरा अतीक ने आंत के कैंसर को बढ़ाने और कीमोथेरेपी को बेअसर करने वाले  डीकेसी1 प्रोटीन की खोज की है, जिससे अब कैंसर के इलाज की नई राह खुलेगी।
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प्रो. बुशरा अतीक - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर आईआईटी की प्रोफेसर बुशरा अतीक ने कोलोरेक्टल कैंसर (आंत के कैंसर) को बढ़ाने और इलाज को बेअसर करने वाले प्रोटीन की खोज की है। शोध के अनुसार डीकेसी1 नामक प्रोटीन कैंसर कोशिकाओं को न सिर्फ तेजी से बढ़ने में मदद करता है, बल्कि इसके इलाज को भी बेअसर करता है। इस खोज की मदद से गंभीर बीमारी के इलाज की दिशा बदल सकती है। यह अध्ययन नेचर कम्युनिकेशंस जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

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कोलोरेक्टल कैंसर दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही एक गंभीर बीमारी है। कई मामलों में मरीज इलाज के बाद भी ठीक नहीं हो पाते। आईआईटी की बायोलॉजिकल साइंस और बायोइंजीनियरिंग की प्रो. बुशरा के शोध के अनुसार डीकेसी1 प्रोटीन शरीर में स्फिंगोलिपिड नामक फैट (लिपिड) के निर्माण की प्रक्रिया को प्रभावित करता है। स्फिंगोलिपिड कोशिकाओं की संरचना, सिग्नलिंग और कोशिका मृत्यु (एपोप्टोसिस) में अहम भूमिका निभाते हैं।

बिगड़ जाता है स्फिंगोलिपिड का संतुलन
डीकेसी1 का स्तर बढ़ने पर प्रक्रिया प्रभावित होती है और कैंसर कोशिकाएं ज्यादा मजबूत और आक्रामक हो जाती हैं। वैज्ञानिकों ने पाया कि डीकेसी1 के बढ़े स्तर के कारण स्फिंगोलिपिड का संतुलन बिगड़ जाता है। इससे ऐसे लिपिड ज्यादा बनने लगते हैं, जो कैंसर कोशिकाओं को पनपने देते हैं। यही वजह है कि कई मरीजों में कीमोथेरेपी और अन्य उपचार ज्यादा असर नहीं करता है।

अधिक उन्नत अवस्था में पाया जाता है कैंसर
शोध में यह भी पाया गया कि डीकेसी1 को कम करने पर (आरएनए इंटरफेरेंस तकनीक के जरिए), कैंसर कोशिकाओं के बढ़ने की रफ्तार काफी धीमी हो गई और कोशिकाएं दवाओं के प्रति अधिक संवेदनशील हो गईं। इससे यह संकेत मिलता है कि अगर डीकेसी1 को टारगेट किया जाए, तो इलाज ज्यादा प्रभावी हो सकता है। जिन मरीजों में डीकेसी1 का स्तर ज्यादा होता है, उनमें कैंसर अधिक उन्नत अवस्था में पाया जाता है।
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कैंसर सिर्फ जीन या कोशिकाओं का रोग नहीं
पूर्वानुमान (प्रोग्नोसिस) भी खराब होता है। यानी यह प्रोटीन न सिर्फ बीमारी को बढ़ाता है, बल्कि मरीज की स्थिति का संकेत भी दे सकता है। यह खोज कैंसर के इलाज में नई दिशा खोल सकती है। अब वैज्ञानिक डीकेसी1 और उससे जुड़े स्फिंगोलिपिड मेटाबॉलिज्म को टारगेट करके नई दवाएं विकसित करने की दिशा में काम कर सकते हैं। शोध से साफ हुआ है कि कैंसर सिर्फ जीन या कोशिकाओं का रोग नहीं है। यह शरीर के मेटाबॉलिज्म से भी गहराई से जुड़ा है।
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