नजूल विभाग से जमीन के सारे रिकॉर्ड देखे गए हैं
इसके बाद म्योर मिल की जमीन को चिह्नित किया। यह मिल कई वर्षों से बंद पड़ी है। करीब डेढ़ लाख वर्ग मीटर जमीन पर मिल निर्माण के अलावा इसका ज्यादातर जमीन का हिस्सा खाली पड़ा है। जमीन के चयन के बाद एडीएम वित्त विवेक चतुर्वेदी, एसडीएम सदर अविचल प्रताप सिंह और तहसीलदार ने मौके पर सर्वे किया। इसके बाद नजूल विभाग से जमीन के सारे रिकॉर्ड देखे गए। इससे पता चला कि जमीन अभी म्योर मिल के नाम है। पहले इस जमीन को सरकार के नाम करने की तैयारी की जा रही। इससे कार्यालय बनाने में किसी तरह की जिला प्रशासन को समस्या नहीं होगी।
मिल के अंदर हटीं मशीनें, दुकानें हो चुकीं नीलामी
एडीएम वित्त विवेक ने बताया कि पहले जमीन राज्य सरकार के कब्जे में लाने की कार्रवाई होगी। मिल में लगी मशीनें हट गई हैं। दुकानों की नीलामी हो चुकी है। पहले जमीन को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कराने और फिर विभागों के निर्माण का प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा। प्रयास है कि मंडल के सभी कार्यालय एक ही जगह संचालित हों और लोगों को भटकना न पड़े।