मौके पर जल रही थीं दो-दो भट्ठियां
पशुपालकों और किसानों के लिए करीब 400 पैकेज भोजन की व्यवस्था करने की बात कही गई थी, लेकिन हकीकत में सिर्फ 200 पैकेट ही भोजन बनाया गया। पैकेट में दो पूड़ी, दो सब्जी और एक-एक रसगुल्ला था। यह सिर्फ पशुपालन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को दिया गया। मेले में आए बच्चे और पशुपालकों को सिर्फ एक समोसा देकर टाल दिया गया जब कि दिखावे के लिए मौके पर दो-दो भट्ठियां जल रही थीं। पानी के लिए धूप में एक टैंकर खड़ा कर दिया था। इसका पानी भी गर्म था।
बृहद मेले हरा चारा के नाम पर पहुंचाया गया सड़ा चारा
- फोटो : amar ujala
पशुओं के लिए लाया गया सड़ा हरा चारा
मेले में आए जानवरों के लिए एक गोशाला से आठ झाल भूसा मंगाया गया था। इसमें से आधा झाल भूसा दो-तीन गोवंशों और भेड़ों को दिया गया। एक ट्राली में हरा चारा भी लाया गया था लेकिन वह सड़ा हुआ था। उसे ट्राली से नीचे उतारने की किसी ने जहमत तक नहीं उठाई। एक ग्रामीण जब जानवर के लिए भूसे की बोरी उठाकर ले जाने लगा तो डॉक्टरों ने उसे पकड़ लिया और भूसा वापस ले लिया।
भीड़ बढ़ाने के लिए दे दिया ठेका
विभाग की तरफ से मेले का प्रचार-प्रसार न होने से भीड़ नहीं रही। बच्चे, महिलाएं और गांव के किसानों को बुलाकर किसी तरह से भीड़ जुटाई गई। पशुओं को दिखाने के लिए किसी एक व्यक्ति को ठेका देकर मेले में किराए पर भेड़ें बुलाई गईं थीं। इसके साथ एक-दो गांवों के किसानों ने अपने ही जानवर लाकर बांध दिए थे, जिससे औपचारिकताएं पूरी हो सकें।
मवेशियों के लिए लाया गया भूसा झाल में भरा रखा रहा
- फोटो : amar ujala
विभाग ने इस तरह खपाया बजट
मद आवंटित बजट
मजदूरी 7,500
यात्रा-व्यय 50,000
लेखन सामग्री 1,670
गाड़ियां 3,610
प्रकाशन 38,890
विज्ञापन 94,500
अन्य व्यय 4,19,500
सामग्री 20,000