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Kanpur: अव्यवस्था की भेंट चढ़ा मंडलस्तरीय पशु मेला, 6.50 लाख के बजट में थमाया समोसा, भूख-प्यास से तड़पे जानवर

Wed, 18 Mar 2026 10:15 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: शिवराजपुर के सैलहा गांव में पशु आरोग्य मेला भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया, जहां 6.50 लाख का बजट होने के बाद भी पशुओं को सड़ा चारा मिला और किसान प्यास से बेहाल रहे। भीड़ दिखाने के लिए किराए पर जानवर बुलाकर केवल खानापूर्ति की गई।
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मेले में धूप में बांधे गए गोवंश - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर में शिवराजपुर ब्लॉक के सैलहा (रानी निवादा) गांव में मंगलवार को पशु पालन विभाग की ओर से आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय वृहद पशु आरोग्य मेला अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ गया। मेले में 6.50 लाख रुपये का बजट खर्च कर किसानों और बच्चों को सिर्फ एक समोसा पकड़ दिया गया। पशुओं के लिए छाया तक की व्यवस्था नहीं की गई। सात घंटे धूप में भूख-प्यास से पशु तड़पते रहे।

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छाया और पानी की सही व्यवस्था न होने के कारण एक बुजुर्ग किसान प्यास के कारण बेहोश होकर गिर पड़ा। मेले का उद्घाटन विधायक राहुल बच्चा सोनकर और ब्लॉक प्रमुख शुभम बाजपेई ने किया। शिविर में पशुओं का निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण और दवा वितरण के साथ-साथ पशुपालकों को योजनाओं की जानकारी दी गई। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनुराग सिंह ने किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से पशुपालन को बढ़ावा देने की बात दोहराई। 

मौके पर जल रही थीं दो-दो भट्ठियां
पशुपालकों और किसानों के लिए करीब 400 पैकेज भोजन की व्यवस्था करने की बात कही गई थी, लेकिन हकीकत में सिर्फ 200 पैकेट ही भोजन बनाया गया। पैकेट में दो पूड़ी, दो सब्जी और एक-एक रसगुल्ला था। यह सिर्फ पशुपालन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को दिया गया। मेले में आए बच्चे और पशुपालकों को सिर्फ एक समोसा देकर टाल दिया गया जब कि दिखावे के लिए मौके पर दो-दो भट्ठियां जल रही थीं। पानी के लिए धूप में एक टैंकर खड़ा कर दिया था। इसका पानी भी गर्म था।

बृहद मेले हरा चारा के नाम पर पहुंचाया गया सड़ा चारा - फोटो : amar ujala
पशुओं के लिए लाया गया सड़ा हरा चारा
मेले में आए जानवरों के लिए एक गोशाला से आठ झाल भूसा मंगाया गया था। इसमें से आधा झाल भूसा दो-तीन गोवंशों और भेड़ों को दिया गया। एक ट्राली में हरा चारा भी लाया गया था लेकिन वह सड़ा हुआ था। उसे ट्राली से नीचे उतारने की किसी ने जहमत तक नहीं उठाई। एक ग्रामीण जब जानवर के लिए भूसे की बोरी उठाकर ले जाने लगा तो डॉक्टरों ने उसे पकड़ लिया और भूसा वापस ले लिया।

भीड़ बढ़ाने के लिए दे दिया ठेका
विभाग की तरफ से मेले का प्रचार-प्रसार न होने से भीड़ नहीं रही। बच्चे, महिलाएं और गांव के किसानों को बुलाकर किसी तरह से भीड़ जुटाई गई। पशुओं को दिखाने के लिए किसी एक व्यक्ति को ठेका देकर मेले में किराए पर भेड़ें बुलाई गईं थीं। इसके साथ एक-दो गांवों के किसानों ने अपने ही जानवर लाकर बांध दिए थे, जिससे औपचारिकताएं पूरी हो सकें।
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मवेशियों के लिए लाया गया भूसा झाल में भरा रखा रहा - फोटो : amar ujala

विभाग ने इस तरह खपाया बजट

मद               आवंटित बजट
मजदूरी           7,500
यात्रा-व्यय       50,000
लेखन सामग्री   1,670
गाड़ियां           3,610
प्रकाशन          38,890
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अन्य व्यय      4,19,500
सामग्री           20,000
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