आज लोग भक्ति को भी ट्रेडिंग का हिस्सा बना रहे हैं। लोग इस बात पर ध्यान देते हैं कि कौन सा गुरु या कौन सी भक्ति सोशल मीडिया पर अधिक प्रसिद्ध है और उसी की पूजा करने लगते हैं। भक्ति और गुरु की साधना कोई प्रतियोगिता नहीं है। सच्चा गुरु वह है जो शिष्य को भगवान की ओर ले जाए। सच्चा भक्त वह है जो बिना दिखावे और स्वार्थ के गुरु के मार्ग पर चले।
यह विचार बुधवार को मोतीझील लॉन में विश्व शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन देवकीनंदन ठाकुर महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने वृद्धा आश्रम में रहने वाले बुजुर्गों को कंबल वितरण कर उनके साथ संवाद भी किया। उन्हें भक्ति और ईश्वर पर विश्वास बनाए रखने का संदेश दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि हर सनातनियों को एकादशी का व्रत अवश्य रखना चाहिए। यह व्रत न केवल शरीर को शुद्ध करता है बल्कि मन और आत्मा को भी निर्मल बनाता है।