घाटों पर बिखरी पड़ी खंडित मूर्तियां और पूजा सामग्री
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सनातन संस्कृति में विसर्जन का अर्थ है…देवता का सम्मानपूर्वक जल या मिट्टी में विलय, ताकि वे पुनः ब्रह्मांड में समाहित हो सकें। लेकिन आज हालात बदल चुके हैं। घाट के किनारे हजारों की संख्या में खंडित और पुरानी मूर्तियां, फूल-मालाओं सहित फेंकी जा रही हैं। कानपुर में बिल्हौर के शिवराजपुर में ऐसी ही तस्वीरें सामने आई हैं।
नदी घाटों पर विसर्जन के नाम पर कचरे का अंबार लग गया है। अक्सर लोग भगवान की खंडित मूर्तियां, पूजा सामग्री, फूल-माला इधर-उधर पेड़ के नीचे फेंक आते हैं। यह देख काफी लोग परेशान भी होते हैं। पर्यावरणविदों का कहना है कि यह समस्या बढ़ती जा रही है, जो अब चरम पर पहुंच गई है।