कानपुर। झकरकटी से टाटमिल तक लगने वाले जाम से निजात दिलाने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने योजना बनाई है। कानपुर के डिपो की बसें दो से तीन माह बाद झकरकटी बस अड्डे से नहीं चलेंगी। उन्हें विकासनगर, जूही, आजादनगर, चुन्नीगंज, उन्नाव, माती डिपो, सिग्नेचर ग्रीन सिटी व रावतपुर बस अड्डे से दूसरे शहरों के लिए रवाना किया जाएगा। सिग्नेचर ग्रीन सिटी बस अड्डे से लखनऊ और पूर्वांचल के लिए बसें चलेंगी। रावतपुर से कानपुर देहात, इटावा के लिए बसें रवाना होंगी। इसके लिए ट्रैफिक विभाग की ओर से रोडवेज के आरएम को पत्र भेजा जाएगा।
झकरकटी बस अड्डे से रोजाना 1000 से 1100 रोडवेज बसों की आवाजाही होती है। मेट्रो रेल निर्माण के चलते बस अड्डे का क्षेत्रफल कम हो गया है। इस कारण लखनऊ, दिल्ली, झांसी, बांदा, गोरखपुर, प्रयागराज जाने वाली बसें जीटी रोड पर ही सवारियां बैठा रही हैं। बसों की कतार लगने से झकरकटी पुल और टाटमिल चौराहे पर हर वक्त जाम की स्थिति रहती है। ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों ने रोडवेज के आरएम और एआरएम के साथ बैठक कर झकरकटी बस अड्डे से बसों की संख्या कम करने की योजना बनाई है। इसके तहत कानपुर के डिपो की बसें झकरकटी बस अड्डे से संचालित नहीं होंगी।
अभी दूसरे शहरों के डिपो के अलावा कानपुर के विकासनगर, जूही, आजादनगर, चुन्नीगंज (फजलगंज डिपो का चुन्नीगंज बस अड्डे में स्थानांतरण हो गया), उन्नाव, माती डिपो की बसें झकरकटी बस अड्डे में आ रही हैं। रावतपुर बस अड्डे से बिधूना, औरैया, इटावा, कन्नौज, फर्रुखाबाद और दिल्ली के लिए बसें जा रही हैं। सिग्नेचर ग्रीन सिटी बस अड्डे उद्घाटन के बावजूद अब तक चालू नहीं हो सका है। यहां से वाया गंगा बैराज होते हुए बसों को लखनऊ ले जाने की प्लानिंग थी लेकिन अब तक शुक्लागंज में सरैया ओवरब्रिज का निर्माण कार्य नहीं हो सका है। सेतु निगम और रेलवे की ओर से कार्य जारी है। ट्रैफिक पुलिस वैकल्पिक मार्गों को भी तलाश रही है।
ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक सिग्नेचर ग्रीन सिटी बस अड्डे की क्षमता 200 से 250 बसों की है। यहां से पूर्वांचल, दिल्ली और प्रयागराज रूट की बसों को संचालित किया जा सकता है। कुछ बसें फर्रुखाबाद और कन्नौज के लिए भी होंगी। जूही डिपो से घाटमपुर, बांदा, हमीरपुर, चित्रकूट, झांसी, जालौन आदि की बसें चलाने की योजना है। विकासनगर और आजादनगर डिपो से भी कई शहरों के लिए बसें चलाई जा सकती हैं। यही स्थिति उन्नाव और माती डिपो की भी रहेगी।
झकरकटी बस अड्डे से बसाें की संख्या कम होने पर दूसरे डिपो की बसें अंदर खड़ी होंगी। इससे यात्रियों को अंदर ही बैठाया जा सकेगा। बस अड्डे को नए सिरे से तैयार किया जाएगा। इसके लिए दो वर्ष पूर्व ही बजट स्वीकृत हो चुका है। यह सात मंजिला बनेगा जिसमें दुकानें व अन्य सुविधाएं रहेंगी।
रोडवेज अधिकारियों के साथ हुई बैठक में झकरकटी बस अड्डे से बसों की संख्या कम करने को लेकर बातचीत हुई है। कानपुर डिपो की बसों को अपने ही डिपो से सीधे संचालित करने के लिए योजना बनाई गई है। - राजेश कुमार पांडेय, एडीसीपी ट्रैफिक