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नवरात्र के आठवें दिन हुआ माता महागौरी पूजन

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कानपुर देहात। नवरात्र के आठवें दिन रविवार को अष्टम माता महागौरी का मंदिरों में पूजन अर्चन किया गया। पंडालों में माता के जयकारे लगे। अष्टमी को बहुतायत संख्या में भक्तों ने उपवास रखा। टोलियों में मंदिर पहुंचे भक्तों ने देवी को पताकाएं चढ़ाई। हवन और अनुष्ठान कराए जाते रहे। माता को फल, नारियल भेंट कर चढ़ावा चढ़ाया गया।
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आचार्य रामजी शुक्ल ने देवी सप्तशती का पाठ कर प्रवचन करते हुए कहा कि अष्टम महागौरी को धन, संपदा, सौंदर्य व स्त्री जनित गुणों की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। भगवान शिव ने जब मां काली को शांत करने के लिए गंगाजल छिड़का तो वह महागौरी हो गई। महागौरी सृष्टि की आधार व सुहाग की प्रतीक हैं। उनके अनुसार ही परिवार का संचालन सुचारू रुप से चलता है। इसलिए हर घर में स्थापित कलश, मंदिर, पंडाल में माता महागौरी पूजा विशेष की जाती है। महिलाओं को अखंड सौभाग्यवती होने का फल प्रदान करती हैं।
अकबरपुर कस्बे की कालिका देवी मंदिर, जैनपुर के सार्वजनिक पार्क के पांडालों, नवीपुर दुर्गा मंदिर, माती, मुरीदपुर, लालपुर, मोहम्मदपुर के मां भगवती मंदिर, डीघ के दुर्गा मंदिर, छतेनी के छत्तेश्वरी देवी मंदिर के साथ पांडालों में पूजन अर्चन किया जाता रहा। सिकंदरा प्रतिनिधि के मंदिरों व पंडालों में माता महागौरी का पूजन किया जाता रहा। पटेल चौक के पास पक्के तालाब परिसर में मां दुर्गा देवी के पंडाल में माता का पूजन किया गया। झींझक प्रतिनिधि के अनुसार कस्बे के देवी मंदिरों व पंडालों में माता महागौरी का पूजन किया जाता रहा। शिवली, रनियां, सरवनखेड़ा, संदलपुर, रसूलाबाद, डेरापुर के देवी मंदिरों व माता के पंडालों में भक्तों की भीड़ जयकारे लगाते हुए जुटी रही।
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