कानपुर देहात में जिला पंचायत चुनाव के परिणाम विधान सभा का भविष्य तय करेंगे। ऐसा हुआ तो जिले में भाजपा को विधानसभा चुनाव में भी करारा झटका लग सकता है। भाजपा की करारी हार से सपा और बसपा दोनों दलों को विधान सभा चुनाव की तैयारी के लिए ऊर्जा मिल गई है।
दोनो दल बेहतर परिणाम मिलने उम्मीद लगाए हैं। इस बार जिले में सपा 10 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है। जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट के लिए सपा ही सबसे मजबूत दिखाई दे रही है। विधानसभा चुनाव 2022 में होने हैं।
ऐसे में पंचायत चुनाव के परिणाम विधान सभा चुनाव के लिए काफी मायने रखेंगे। जिले में 32 सीटों पर भाजपा ने अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे थे। भोगनीपुर विधानसभा में सिर्फ कटेठी सीट पर भाजपा प्रत्याशी जीता है। अकबरपुर रनियां विधानसभा क्षेत्र की बारा जिला पंचायत सीट से भाजपा प्रत्याशी को जीत मिली है। सिकंदरा विधानसभा क्षेत्र में दो सीटें भाजपा जीत गई है। यहां की राजपुर प्रथम और राजपुर तृतीय सीट भाजपा की झोली में गई।
यदि विधानसभावार देखा जाए तो सिकंदरा विधान सभा में भाजपा को दो सीटें मिली हैं। अकबरपुर रनियां व भोगनीपुर में एक-एक प्रत्याशी जीता है। रसूलाबाद विधानसभा भाजपा का खाता नहीं खुला। जबकि जिले की चारों विधानसभा में भाजपा विधायक हैं। वहीं जिला चार संसदीय क्षेत्रों में बटा हुआ है।
इसमें जालौन गरौंठा से भोगनीपुर विधान सभा जुड़ी है। यहां से सांसद भानु प्रताप वर्मा हैं। अकबरपुर लोक सभा में अकबपुर रनियां विधान सभा है। सांसद देवेंद्र सिंह भोले हैं। इटावा लोकसभा से सिकंदरा विधान सभा जुड़ी है। यहां से सांसद रामशंकर कठेरिया हैं और कन्नौज लोक सभा ससंदीय क्षेत्र में रसूलाबाद विधान सभा है।
यहां पर सुब्रत पाठक सांसद हैं। चारों सीटों पर भाजपा के ही सांसद है। इसके बावजूद जिले में बुरी तरह से हार हुई है। भाजपा की हार से सत्ता के लिए संघर्ष कर रही सपा को विधानसभा चुनाव में बेहतर परिणाम आने की उम्मीद दिखी है। बसपा ने छह सीटें हासिल की है। इससे बसपा भी खुद को मजबूत स्थिति की ओर बढ़ते देख रही है।
अध्यक्ष की सीट बचाने के लिए सपा का संघर्ष
जिला पंचायत अध्यक्ष सीट के लिए सदस्यों को पक्ष में करने की कवायद शुरू हो गई है। किसी भी दल ने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की है। डेढ़ दशक से जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पर सपा का कब्जा है। सपा इस सीट को बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक देगी। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व सीएम अखिलेश यादव अभी से सक्रिय हो गए हैं।
वह स्वयं इस सीट पर गणित लगाने लगे हैं। उन्होंने कई जिला पंचायत सदस्यों से फोन पर बात की है। इसकी चर्चा होते ही हचलच तेज हो गई है। जबकि बसपा के पास छह सदस्य हैं वहीं 11 निर्दलीय है। इससे बसपा भी निर्दलीयों के सहारे अध्यक्ष की सीट तक पहुंचने का रास्ता बना रही है।
निर्दलीय साथ दे गए तो भी भाजपा को कम पड़ेंगे दो सदस्य
सत्ताधारी दल भाजपा के पास केवल चार सदस्य हैं। इन्हें जीत के लिए 13 और सदस्यों की जरूरत पड़ेगी। भाजपा पूरे 11 निर्दलीय सदस्य अपने पाले में कर लेती है तो इनके पास कुल 15 सदस्य होंगे। अध्यक्ष का चुनाव जीतने के लिए 17 सदस्यों की जरूरत है। ऐसे में भाजपा को दो सदस्यों के लिए जोड़तोड़ करनी पड़ेेगी। तब बिना सपा या बसपा सदस्य के सहयोग से भाजपा चुनाव नहीं जीत पाएगी।
दिग्गज नेता भी नहीं बचा पाए प्रतिष्ठा
भाजपा के पंचायत राज प्रकोष्ठ के बुंदेलखंड प्रभारी डेरापुर के पूर्व ब्लाक प्रमुख डॉ. विवेक द्विवेदी को सिठमरा से लड़ाया था। इन्हें निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष निर्दलीय राम सिंह यादव ने भारी मतों से हराया। इसी तरह से पूर्व जिलाध्यक्ष मदन पांडेय को पार्टी ने रंजीतपुर से उतारा वह भी बुरी तरह से सपा प्रत्याशी उमेश दुबे से हार गए।
तिलौची सीट से भाजपा के महामंत्री रहे राजेंद्र सिंह उर्फ मलखान सिंह को निर्दलीय शुभभ ने मतों के भारी अंतर से हराया। यहां दूसरे नंबर पर निर्दलीय प्रत्याशी राघव अग्निहोत्री रहे। भाजपा नेता सत्येंद्र सिंह भदौरिया की पत्नी रागिनी भदौरिया को हार का सामना करना पड़ा।