कानपुर देहात। अकबरपुर-रनियां सीट पर भाजपा पुराने तो सपा, बसपा और कांग्रेस ने नए चेहरों पर दांव खेला है। अनुसूचित जाति और ब्राह्मण बहुल मतदाताओं वाली इस सीट पर ब्राह्मण प्रत्याशी उतारकर भाजपा जीत का क्रम बनाए रखने की कोशिश में है।
मुकाबले में कांग्रेस क्षत्रिय तो सपा और बसपा पिछड़ी जाति के प्रत्याशी के सहारे अपनी-अपनी जीत की तलाश में हैं। सभी प्रमुख दलों के सामने असंतुष्टों और जातीय समीकरणों को साधने की कड़ी चुनौती होगी।
अकबरपुर-रनियां सीट सदर के नाम से जानी जाती है। अकबरपुर और मैथा तहसील समेत रूरा, अकबरपुर-रनियां व शिवली नगर निकाय क्षेत्र इस सीट से जुड़े हैं। सभी दलों ने जातिगत समीकरण के तहत प्रत्याशी उतारे हैं।
भाजपा ने ब्राह्मण के साथ अन्य सवर्ण मतदाताओं की संख्या को देखते हुए विधायक प्रतिभा शुक्ला पर ही दांव आजमाया है। वहीं, सपा ने पूर्व प्रत्याशी नीरज सिंह गौर से इस बार किनारा कर लिया।
यहां कुशवाहा, मुसलमान और यादव वोटों को ध्यान में रखकर पूर्व में घाटमपुर से विधायक रहे आरपी कुशवाहा को मैदान में उतारा है। जातिगत समीकरणों के सहारे वह खुद को मजबूत तो मान रहे हैं, लेकिन नीरज सिंह गौर का टिकट कटने से एक धड़े में असंतोष भी है।
वर्ष 2002 के चुनाव में यहां सपा छोड़कर बसपा में शामिल हुए रामस्वरूप सिंह गौर जीते थे। हालांकि, बाद में रामस्वरूप ने घर वापसी कर ली और इसका फायदा पार्टी को मिला और लगातार दो बार वह इस सीट से विधायक बने।
बसपा के पूर्व प्रत्याशी सतीश शुक्ला अब भाजपा में हैं तो पार्टी ने यहां नये चेहरे विनोद पाल को उतारा है। अनुसूचित जाति व पाल वोटरों के आंकड़ेे से देखें तो बसपा कड़ी टक्कर में है।
इधर, कांग्रेस ने ठाकुर व मुस्लिम वोटरों के समीकरण पर अंबरीश सिंह को प्रत्याशी बनाया है। अब अंबरीश अन्य वोटरों में कितनी सेंधमारी कर पाएंगे यह तो वक्त ही बताएगा।
सीट का इतिहास
पुनर्गठन के बाद 2012 में अकबरपुर-रनियां विधानसभा सीट बनी। 2012 मेें सपा के रामस्वरूप सिंह गौर ने भाजपा की प्रतिभा शुक्ला को हराकर जीत हासिल की। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने दांव पलट दिया। प्रतिभा शुक्ला ने सपा प्रत्याशी व पूर्व विधायक रामस्वरूप सिंह के पौत्र नीरज सिंह गौर को हराकर चुनाव जीता।
अन्य दलों में बड़े अंतर को पाटने की होगी मशक्कत
वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा की प्रतिभा शुक्ला ने 87430 वोट पाकर जीत दर्ज की थी। सपा के नीरज सिंह को 58701 और बसपा के सतीश शुक्ला को 45761 वोट मिले थे। 28 हजार से अधिक मतों के अंतर से भाजपा ने यह सीट सपा से छीन ली थी।
इसके पहले 2007 व 2012 के चुनाव में यह सीट सपा के खाते में रही। इस बार भाजपा ने प्रत्याशी नहीं बदला है। जबकि बसपा और सपा दोनों पार्टियों से नए प्रत्याशी मैदान में हैं। जानकारों के अनुसार पिछले चुनाव में भाजपा की जीत का बड़ा अंतर दूर करना प्रतिद्वंद्वियों के लिए मशक्कत भरा है।