कानपुर देहात जेल में बंद डकैत मंगली केवट ने अन्य बंदियों से जान का खतरा बताया है। उसने अपर जिला सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक को पत्र देकर स्पेशल गार्ड की व्यवस्था कर पेशी पर लाने का अनुरोध किया है। कोर्ट से ये भी बताया कि इसके पहले उसे अन्य बंदियों से अलग पेशी पर लाया जाता था, लेकिन चार अक्तूबर से ये व्यवस्था बंद कर दी गई है।
लूट, डकैती, अपहरण, हत्या के आरोपी डकैत मंगली केवट 19 जुलाई 2006 से लगातार जेल में निरुद्ध है। पहले वह कानपुर नगर की जेल में रहा। इस समय छह वर्षों से माती जेल में है। वर्ष 2006 में तत्कालीन डीआईजी कानपुर ने मंगली केवट को स्पेशल गार्ड की निगरानी में जेल से कोर्ट में पेशी पर ले जाने के निर्देश दिए थे।
तब से लगातार उसे अन्य बंदियों से अलग भेजा जा रहा था। फिलहाल चार अक्तूबर से उसे अन्य बंदियों के साथ ही जेल से कोर्ट भेजा जाने लगा। कचहरी की हवालात में अन्य बंदियों के साथ ही उसे रखा जाता है। ऐसे में उसने खुद को असुरक्षित महसूस करने की बात कही है। मंगलवार को मंगली केवट ने अपर जिला सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय निजेंद्र कुमार को प्रार्थना पत्र देकर जान का खतरा बताते हुए अन्य बंदियों से अलग स्पेशल गार्ड की निगरानी में जेल से कोर्ट भेजे जाने की मांग की है।
उसने कोई घटना होने पर आरआई को जिम्मेदार ठहराने की बात कही। कहा कि स्पेशल गार्ड की व्यवस्था आरआई के स्तर से ही तय होती है। उन्होंने ही उसके स्पेशल गार्ड हटाए हैं। सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रदीप कुमार पांडेय द्वितीय ने बताया कि मंगली केवट ने सुरक्षा के लिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया है।