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Kanpur Dehat: जरैलापुर गांव में हुई थी युवक की हत्या, दो को आजीवन कारावास की सजा, अर्थदंड भी लगाया

Fri, 28 Jul 2023 01:07 AM IST
कानपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर देहात

सार

अदालत में साबित हो गया कि दोषियों की तरफ से छत से चलाई गई गोली से युवक की मौत हुई। बरामद लाइसेंसी रायफल व कारतूस को प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा था। जहां रायफल में फायरिंग के अवशेष मौजूद मिले थे।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कानपुर देहात में अकबरपुर के जरैलापुर गांव में करीब सात वर्ष पहले जमीन की रंजिश में की गई फायरिंग से एक युवक की मौत हो गई थी। वहीं, युवक के पिता घायल हो गए थे। मामले की सुनवाई करते हुए एडीजे प्रथम की अदालत ने गुरुवार को दोषी दो लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही अर्थदंड भी लगाया है।

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सहायक शासकीय अधिवक्ता देवेंद्र कुमार मिश्रा व विवेक कुमार त्रिपाठी ने बताया कि अकबरपुर के जरैलापुर गांव निवासी शीलू ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें कहा था कि 23 मार्च 2016 में उसका भाई अमित खेत में पानी लगाने गया था। वहां पड़ोसी संतराम व पप्पू ने भाई के साथ मारपीट की थी।
घर आकर उसके भाई अमित ने घटना की जानकारी पिता को दी। इस पर पिता गिरजाशंकर व भाई प्रांशू संतराम के दरवाजे पर खड़े होकर उलाहना दे रहे थे। इससे नाराज संतराम, बिंदा, पप्पू उर्फ मुनीम व पप्पू ने अपने मकान की छत से गाली गलौज शुरू कर दी। इसके बाद संतराम व बिंदा ने रायफल व तमंचे से भाई व पिता पर फायर कर दिया।

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इससे प्रांशू की मौके पर ही मौत हो गई। पिता गिरजाशंकर गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने मामले में संतराम व बिंदा के खिलाफ हत्या व जानलेवा हमला करने सहित अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की थी। मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम चंद्रशेखर की अदालत में चल रही थी।

बुधवार को अदालत ने संतराम व बिंदा उर्फ वीरेंद्र को हत्या व जानलेवा हमले में दोषी करार दिया था। गुरुवार को अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। प्रत्येक पर 30-30 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड अदा न करने पर एक वर्ष की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।

पोस्टमार्टम व प्रयोगशाला रिपोर्ट बने सजा का आधार
सहायक शासकीय अधिवक्ता विवेक कुमार त्रिपाठी ने बताया कि मामले में पोस्टमार्टम व घटना में प्रयोग की गई रायफल व कारतूस की प्रयोगशाला रिपोर्ट दोषियों को सजा दिलाने में अहम साक्ष्य रहे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में घटना में प्रयोग की गई रायफल की गोली मृतक के दाएं कंधे के नीचे मौजूद मिली थी। मृतक के कंधे व जबड़े की हड्डी टूटी पाई गई थी।
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इससे अदालत में साबित हो गया कि दोषियों की तरफ से छत से चलाई गई गोली से युवक की मौत हुई। बरामद लाइसेंसी रायफल व कारतूस को प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा था। जहां रायफल में फायरिंग के अवशेष मौजूद मिले थे। वहीं, सहायक शासकीय अधिवक्ता विवेक कुमार त्रिपाठी ने बताया कि मामले में अभियोजन की ओर से तीन प्रत्यक्षदर्शी अमित कुमार, शीलू व गिरजा शंकर समेत नौ गवाहों को अदालत में पेश किया गया। इन्होंने घटना को पूर्ण रूप से साबित किया।
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