शुक्लागंज (उन्नाव)। अजगैन के चमरौली गांव निवासी मजदूर सुरजन की आर्थिक मजबूरी ने गर्भवती को सड़क पर प्रसव की नौबत तक पहुंचा दिया। शुक्लागंज न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के करीब हुए इस वाकये में नवजात बच्ची की मौत हो गई। घटना ने जच्चा-बच्चा सुरक्षा के बड़े-बड़े सरकारी दावों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए।
मजबूर हालात की चपेट में आया मजदूर सुरजन गर्भवती पत्नी सोनी (35) को दिक्कत होने पर शनिवार को आदर्श नगर मोड़ के करीब एक नर्सिंग होम ले गया। चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड के लिए भेजा। निजी सेंटर पर पत्नी का अल्ट्रासाउंड कराके लौटा तो रिपोर्ट देख उसे पत्नी को फौरन अस्पताल में भर्ती करने की सलाह दी। अल्ट्रासाउंड और आवाजाही के खर्च के बाद जेब ने साथ नहीं दिया तो वह फिर भर्ती कराने की बात कहते हुए घर की ओर चल दिया। नह सड़क के दूसरे छोर तक ही पहुंचा था कि असहनीय पीड़ा के कारण पत्नी वहीं बैठ गई। उसकी छटपटाहट देख आसपास की महिलाएं दौड़ीं। माहौल भांपकर कपड़ों के परदे लगाकर प्रसव कराया लेकिन सड़क पर जन्मी बच्ची की जान नहीं बचाई जा सकी। गाजीखेड़ा की रहने वाली लक्ष्मी गौतम ने महिला को एक दूसरे नर्सिंग होम में पहुंचवाया। वहां प्राथमिक उपचार बाद उसे जिला अस्पताल भेज दिया गया।
सुरजन का कहना है कि अपनी साली के घर आया होने की वजह से इलाका नया था। शुक्लागंज न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र करीब होने की जानकारी नहीं थी। मौके से लेकर अस्पताल तक कई तरह के सवाल उठे। कई लोगों ने महिला को धनाभाव में भर्ती न करने पर नर्सिंगहोम को निशाने पर लिया। अधिकांश ने महिला के गर्भधारण से लेकर सुरक्षित प्रसव तक के सरकारी इंतजामों पर अमल न होने का मुद्दा उठाया। चर्चा पुलिस तक भी पहुंची। एसएसआई रवींद्र सिंह भदौरिया ने कहा कि प्रभावित परिवार की ओर से कोई शिकायत मिली तो कार्रवाई की जाएगी।
गर्भवतियों के लिए सरकारी प्रावधान
-आशा, आंगनबाड़ी वर्करों से गर्भवतियों की निगरानी
-गर्भधारण के साथ टीकाकरण, दवा, सही खुराक का अभियान
-पोषण युक्त खुराक के लिए गोद भराई कार्यक्रम
-सौ फीसदी संस्थागत प्रसव के तहत सरकारी केंद्रों पर डिलीवरी