मूंग की फसल की सिंचाई करता किसान। संवाद
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सरवनखेड़ा। जायद की फसल में बोई गई उर्द व मूंग के पौधों में कीड़ों का प्रयोग दिख रहा है। यह कीड़े पौधों की पत्तियों को चट कर रहे हैं। किसान फसल को बचाने के लिए तीन-तीन बार कीटनाशक का छिड़काव कर चुके हैं। रोकथाम न होने से अब फसल की सिंचाई करने को मजबूर हैं। वैज्ञानिकों ने दवा का छिड़काव सुबह जल्दी या शाम को ही करने की सलाह दी है।
सरवनखेड़ा क्षेत्र में इस बार अधिकतर खेतों में लाही व सरसों की बुवाई की गई थी। इसके बाद खाली हुए खेतों में जायद फसल के रूप में किसानों ने उर्द व मूंग की बुवाई कर दी। फसल में लगे कीट ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। कीट फसल की पत्तियों को चट कर रहे हैं।
जिससे खेत में सिर्फ डंठल ही बच रहे हैं। फसल को बचाने के लिए किसान लगातार दवा का छिड़काव कर रहे, लेकिन इसका असर नहीं हो रहा है। सैंथा गांव के किसान पुत्तन लाल मिश्रा ने बताया कि मूंग की फसल में फूल आने के समय सिंचाई की जाती थी।
जिससे फूल निकल आते थे और अच्छा उत्पादन मिलता था, लेकिन इस बार फसल बचाने के लिए बुवाई के एक माह बाद ही सिंचाई करनी पड़ रही है। इसी तरह गंगागंज गांव के किसान लल्लन सिंह ने बताया कि तीन बार दवा का छिड़काव करने के बाद भी फसल बचा पाना मुश्किल हो रहा है।
जसवापुर गांव के किसान मनोज बाजपेयी ने बताया कि शुरू में ही सिंचाई करने से अब हर बार 15 दिन बाद सिंचाई करने की मजबूरी है। सेरूवा गांव के किसान कमलेश पासवान ने बताया कि पहले मूंग की फसल में एक सिंचाई करनी पड़ती थी, लेकिन कीट के चलते कई बार सिंचाई करना मजबूरी है।
वहीं कृषि वैज्ञानिक डॉ. खलील खान ने बताया कि किसान फसल में क्यूनाल फास्ट दवा का छिड़काव एक लीटर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से करें। दवा का छिड़काव हमेशा सुबह जल्दी व शाम को ही करें। जिससे दवा का असर हो सके। उन्होंने बताया कि धूप निकलने पर कीड़ा छिप जाता है। जिससे दवा का असर नहीं हो पाता है।