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शातिर को लूट के तीन मामलों में कोर्ट ने सुनाई सजा

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कानपुर देहात। लूट की अलग-अलग हुई वारदातों में एक ही लुटेरा शामिल रहा। संयोग रहा कि तीनों लूट की घटनाओं पर अदालत ने एक ही दिन फैसला सुनाया। तीनों वारदातों में लुटेरे को अलग-अलग सजा सुनाई गई। लुटेरों ने लूट की इन तीनों वारदातों को मई और जून 2012 में अंजाम दिया था।
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शिवराजपुर क्षेत्र में पांच साल पहले हुई लूट के मामले में शिवराज उर्फ अमित को कोर्ट ने साढ़े सात साल का कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न अदा न करने पर दो माह के अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। लूट के माल की बरामदी में एक साल की सजा और दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। दोनों सजाएं एक सजा चलेगी। पहले जेल में काटी गई अवधि सजा में शामिल होगी।
शिवराजपुर निवासी रामकृष्ण कटियार ने 29 जून 2012 को क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की शिवराजपुर शाखा में अपने खाते से 24 हजार रुपये निकालने गए थे। उनके पास 220 रुपये पहले रखे थे। रामकृष्ण बैंक से पैदल घर लौट रहे थे। तभी एसबीआई शिवराजपुर के सामने जीटी रोड पर बाइक से आए दो बदमाशों ने उसे रोका और जान के मारने की धमकी देकर नोटों से भरा बैग छीनकर भाग गए थे। तत्कालीन थानाध्यक्ष ने रामकृष्ण की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज की थी। इस मामले में सीटीएस कालोनी गली नंबर-चार कल्याणपुर (कानपुर नगर) निवासी शिवराज उर्फ अमित को गिरफ्तार किया गया था। अमित की निशानदेही पर लूट का माल और वारदात में प्रयुक्त बाइक बरामद की थी। मामले की सुनवाई तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश सुधीर कुमार की कोर्ट में चल रही थी। शनिवार को कोर्ट ने शिवराज उर्फ अमित को सजा सुनाई।
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लूट के दूसरे मामले में भी तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश सुधीर कुमार ने शिवराज उर्फ अमित को साढ़े सात साल का कारावास और दस हजार रुपये अर्थ दंड की सजा सुनाई है। शिवराजपुर में सोमवती ने 26 मई 2012 को रिपोर्ट दर्ज कराते हुए कहा था कि वह बेटी के साथ बैंक ऑफ बड़ौदा की शिवराजपुर शाखा गई थी। उन्होंने अपने खाते से 25 हजार रुपये निकाले। रुपये झोले में रखने के बाद बेटी के साथ सड़क की दक्षिणी पटरी की तरफ पहुंची। बेटी उपेंद्र की दुकान से किताब खरीदने लगी। उसी दौरान डिस्कवर बाइक सवार बदमाश झपट्टा मारकर उनके हाथ से झोला लेकर भाग गया। झोले में कुल साढ़े 25 हजार रुपये थे। पुलिस ने इस मामले में शिवराज उर्फ अमित को गिरफ्तार करके जेल भेजा था। विवेचना में शिवराज पर लगा लूट का आरोप सही साबित हुआ। विवेचक ने उसके खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया था। शनिवार को कोर्ट ने शिवराज को सजा सुनाई।
तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश सुधीर कुमार ने लूट में शिवराज उर्फ अमित को साढ़े सात साल का कारावास और दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। ककवन थाने में उमाकांत त्रिपाठी ने 28 जून 2012 को लूट की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि उनके छोटे भाई कृष्णकांत की खाद की दुकान ककवन थाने के सामने है। वह और कृष्णकांत त्रिपाठी उर्फ मुन्ना खुद रामबाग, कानपुर नगर में रहते हैं। वहीं से दुकान आते और जाते हैं। 27 जून को कृष्णकांत साथी राजेश स्वर्णकार के साथ बाइक से ककवन से बिल्हौर जा रहे थे। ककवन नहर पुल और कुसौली मोड के बीच बाइक सवार बदमाशों ने कृष्णकांत को गोली मारकर नोटों से भरा बैग लूट लिया था। इस मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने शिवराज को साश्रम कारावास और अर्थ दंड की सजा सुनाई।
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