कानपुर देहात। दहेज हत्या के मामले में अभियुक्त के अधिवक्ता की ओर से डॉक्टर से जिरह न करने पर अदालत ने नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि गवाही के लिए बुलाकर जिरह न करने से डॉक्टर का एक दिन का समय बर्बाद हो गया। इसलिए अभियुक्त डॉक्टर के एक दिन के वेतन की रकम बतौर हर्जाना कोषागार में जमा कराए।
कानपुर नगर के सजेती क्षेत्र में हुई दहेज हत्या के मामले की सुनवाई अपर जिला सत्र न्यायाधीश सप्तम प्रवीण कुमार पांडेय की अदालत में चल रही है। मंगलवार को अदालत ने अभियुक्त अनुज कुमार के अधिवक्ता की लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई। सहायक शासकीय अधिवक्ता लाल मोहम्मद ने बताया कि उर्सला अस्पताल के डॉ. सुरेंद्र बाबू को छह अगस्त को अदालत में तलब कर बयान दर्ज कराए गए थे। उस समय अभियुक्त के अधिवक्ता ने डॉक्टर से जिरह नहीं की थी। शासकीय अधिवक्ता ने जिरह न करने पर अभियुक्त पर हर्जाना लगाए जाने को कहा था।
कोर्ट ने 13 अगस्त की तिथि सुनवाई के लिए तय की थी। मंगलवार को डॉक्टर निर्धारित तिथि पर उपस्थित हुए। उन से जिरह हुई। इसके पहले जिरह न करने पर डॉक्टर का एक दिन का वेतन 6124 रुपये अभियुक्त अनुज कुमार से सरकारी खजाने में जमा करने का आदेश दिया। सुनवाई की अगली तिथि 27 अगस्त निर्धारित की है।