इस ई-मेल से उन्होंने एचएएल से पार्ट्स का भुगतान करने के लिए न्यूयार्क स्थित अपने खाते की डिटेल भेजकर 55 लाख रुपये जमा कराने को कहा। पैसा भेजने के बाद भी जब पार्ट्स की डिलीवरी नहीं हुई तो अफसरोें ने कंपनी से बातचीत की। तब पता चला कि अमेरिकी कंपनी के खाते में रकम ट्रांसफर ही नहीं हुई। जब एचएएल के अफसरों ने मेल आईडी और खाता संख्या कंपनी को बताई तो पता चला दोनों फर्जी हैं। रविवार को डीसीपी क्राइम आशीष श्रीवास्तव, एडीसीपी क्राइम अंजलि विश्वकर्मा, साइबर थाने के विशेषज्ञ एचएएल पहुंचे। वहां के अधिकारियों से बातचीत की। साइबर सिस्टम की जांच कराई। वहां के विशेषज्ञों से साइबर हमले को लेकर चर्चा की।
एडीसीपी अंजलि विश्वकर्मा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में धोखाधड़ी की पुष्टि हुई है। इसकी साजिश अमेरिका में रची गई है, इसकी जांच चल रही है। फिलहाल 55.13 लाख रुपये लेने के लिए जिस ई-मेल का इस्तेमाल किया गया है, उसका आईपी एड्रेस अमेरिका का निकला है। इसके लिए इंटरपोल और अमेरिकी एजेंसी की मदद ली जाएगी। लखनऊ स्थित साइबर सेल मुख्यालय से पत्राचार भी किया गया है।
एचएएल के अथॉरिटी अधिकारी की लापरवाही के चलते हुई ठगी
अमेरिका में बैठे साइबर ठग ने एचएएल के अथॉरिटी अधिकारी के लापरवाही का फायदा उठाते हुए ठगी को अंजाम दिया। एचएएल ने विमान से संबंधित पार्ट्स खरीदने के लिए अमेरिका की कंपनी की ई-मेल आईडी
gledbetter@ps-engineering.com पर ऑर्डर संबंधी बात की थी। आशंका है कि शातिर ठगों ने अमेरिका के कंपनी के किसी कर्मचारी को अपने गिरोह में मिलाकर कंपनी से मिलती जुलती ई-मेल आईडी
gledbetter@pe-enginering.com बनाई और इसी ई-मेल से एचएएल के अफसरों से बात की, लेकिन अफसरों ने ईमेल के जांचे बिना रुपये ट्रांसफर कर दिए।