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KANPUR: एसटीएफ के नाम से दबिश दे रही क्राइम ब्रांच, खेल में फंस रहे लोग

Mon, 23 May 2022 12:22 PM IST
शिखा पांडेय सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर

सार

क्राइम ब्रांच के कई पुलिसकर्मी विवादों से घिरे रहे हैं। एटीएम हैकर गिरोह में शामिल हेड कांस्टेबल अमित फरार है। सिपाही राजीव यादव समेत दो सिपाहियों की जांच चल रही है। वहीं हाल में बदमाश अंकित लाला का करीबी क्राइम ब्रांच में तैनात रहा दरोगा मोहम्मद आसिफ निलंबित भी किया जा चुका है।
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एसटीएफ - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कमिश्नरी की क्राइम ब्रांच के कुछ पुलिसकर्मियों का नया खेल उजागर हुआ है। ये पुलिसकर्मी शहर में अलग-अलग जगह दबिश देकर जब लोगों कोे उठाते हैं तो खुद को एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) से बताते हैं। पिछले कुछ दिनों में ऐसे 11 मामले सामने आए हैं। इसका खुलासा तब हुआ जब उठाए गए लोगों के परिजनों ने एसटीएफ से संपर्क किया।
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इसको लेकर एसटीएफ के अफसर परेशान हैं। सवाल है कि आखिर ये खेल क्राइम ब्रांच क्यों कर रही है। एसटीएफ कानपुर यूनिट में तैनात एक पुलिस अफसर ने बताया कि कुछ समय पहले आर्य नगर से एक बाजपेई नाम का शख्स उठाया गया था। कल्याणपुर में वाहन चोर पकड़े थे।

दोनों ही मामलों में आरोपियों को उठाया तो क्राइम ब्रांच ने था लेकिन पुलिसकर्मियों ने खुद को एसटीएफ में तैनात बताया था। इस तरह के नौ और मामले हैं, जिसमें क्राइम ब्रांच के पुलिसकर्मियों ने खुद को एसटीएफ का बताया। सभी मामलों का रिकॉर्ड एसटीएफ ने तैयार किया है। एसटीएफ का कहना है कि ये तरीका बिल्कुल ठीक नहीं है। कार्रवाई क्राइम ब्रांच करती और लोग उनके दफ्तर पहुंचते हैं। बाद में पता चलता है कि क्राइम ब्रांच की टीम ने संबंधित शख्स को उठाया है।
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कहीं एसटीएफ के नाम पर वसूली तो नहीं 
क्राइम ब्रांच के कई पुलिसकर्मी विवादों से घिरे रहे हैं। एटीएम हैकर गिरोह में शामिल हेड कांस्टेबल अमित फरार है। सिपाही राजीव यादव समेत दो सिपाहियों की जांच चल रही है। वहीं हाल में बदमाश अंकित लाला का करीबी क्राइम ब्रांच में तैनात रहा दरोगा मोहम्मद आसिफ निलंबित भी किया जा चुका है। ऐसे में ये भी आशंका है कि क्राइम ब्रांच के जो पुलिसकर्मी खुद को एसटीएफ का बता लोगों को उठाते हैं उन मामलों में कहीं वसूली का खेल तो नहीं है, जिससे नाम एसटीएफ का हो और काम क्राइम ब्रांच कर ले जाए।
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एसटीएफ के नाम का रौब
आमतौर पर एसटीएफ बड़े गुडवर्क करती है। अपराधियों व आम लोगों में पुलिस से अधिक एसटीएफ का खौफ रहता है। शायद यही वजह हो जो क्राइम ब्रांच के पुलिसकर्मी एसटीएफ के नाम का इस्तेमाल करते हैं। जो 11 मामले एसटीएफ के पास पहुंचे हैं, उसमें अधिकतर लोगों को बाद में क्राइम ब्रांच ने छोड़ दिया है। इससे कई और सवाल भी खड़े हो जाते हैं। 

अभी तक ऐसा मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया है। मामले में एसटीएफ से संपर्क कर जानकारी जुटाई जाएगी। अगर ऐसा किया जा रहा होगा तो विस्तृत जांच कराई जाएगी। इसमें जो पुलिसकर्मी संलिप्त होंगे उन पर कार्रवाई होगी।- आनंद प्रकाश तिवारी, ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर कानून-व्यवस्था

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