रकम को विजेता के खाते में भेजते हैं
भुगतान की जानकारी नोएडा में बैठे अधिकारियों द्वारा व्हाटसएप ग्रुप पर भेजी जाती है। वह जिस रकम को विजेताओं को देते हैं] वह साइबर ठगों द्वारा डिजिटल अरेस्ट, हनीट्रैप, ब्लैकमेलिंग जैसे साइबर अपराध से जुटाई गई होती है। उदाहरण देकर समझाया कि वह साइबर ठगों से उनकी एक लाख की रकम को महज 60 हजार रुपयों में खरीद लेते हैं। इसके बाद इस रकम को विजेता के खाते में भेजते हैं।
कमाई को डॉलर या बिटकॉइन में बदल लिया जाता
यही वजह ही आए दिन सट्टा खेलने वालों का बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिया जाता है। कहा कि गेमिंग एप से जुड़ने के लिए लोगों को उनके सरगना से आईडी खरीदनी पड़ती है। आईडी मिलने के बाद ही गैंग के सदस्य उन्हें सट्टा खिलवाते हैं। वहीं, टिंग एप से होने वाली कमाई को डॉलर या बिटकॉइन में बदल लिया जाता है। उनके सिम अलग-अलग बैंकों के खातों से जुड़े होते हैं।
टैक्सी-कैब से घूमकर करते भुगतान
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि अक्सर एक जगह से ठगी से जुड़े बैंक ट्रांजेक्शन या कॉल को पुलिस हॉट स्पॉट के रूप में चिह्नित कर लेती है। ऐसे में शातिर पुलिस को चकमा देने के लिए टैक्सी और कैब में घूम-घूमकर रकम ट्रांसफर करने की रणनीति अपना रहे थे। इन आरोपियों ने एक जिले से दूसरे जिले तक घूम कर भुगतान किया है।
पहले भी पकड़े जा चुके गैंग के सदस्य
डीसीपी साउथ ने बताया कि सितंबर 2025 में रतनलालनगर के हैप्पी टॉवर से बर्रा पुलिस ने इसी गैंग के सदस्यों को पकड़ा था। उनसे पूछताछ के बाद से पुलिस अन्य साथियों को खोज रही थी। तब उन्होंने भी बताया था कि उनके पास पार्सल आता है।
ये था पूरा मामला
बर्रा पुलिस ने दुबई से संचालित बेटिंग एप से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार कर सोमवार को जेल भेजा। पकड़े गए आरोपियों में गुजैनी का सत्यम तिवारी, बर्रा पांच का अनमोल विश्वकर्मा, डब्ल्यू-1 साकेतनगर का नितिन गुप्ता, धर्मेंद्रनगर का अभिषेक वर्मा, नेहरूनगर निवासी हितेश निगम, बनिया बाजार कैंट निवासी स्नेहिल बजाज, आवास विकास हंसपुरम का सुल्तान अहमद और नौशाद शामिल हैं। सभी को बर्रा पीले पुल के पास से पकड़ा गया।
हर माह 25 से 50 हजार रुपये की सैलरी मिलती थी
डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि आरोपी प्रतिबंधित गेमिंग एप लोटस 365, रेडी बुक, कार्तिकेय और दुबई ईएक्सएच पर सट्टा खिला रहे थे। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उनके वॉट्सएप ग्रुप पर बैंक खाते के नंबर और भेजी जाने वाली धनराशि की डिटेल आती थी। इसके बाद जीतने वाले व्यक्ति के बताए गए खाते में उतनी रकम जमा कर देते थे। इसके बदले उन्हें हर माह 25 से 50 हजार रुपये की सैलरी मिलती थी।
बड़ी रकम लगाने पर हरा दिया जाता
खास बात ये है कि पकड़े गए शातिर सट्टा जीतने वालों को साइबर ठगी की रकम भेजकर खपा रहे थे। आरोपियों ने कबूला है कि वह चर्चित बेटिंग एप के क्लोन तैयार कर लोगों को सट्टा खिला रहे थे। जो लोग भी एप पर सट्टा खेलने आते हैं उन्हें पहले छोटी-छोटी रकम तो जिता दी जाती, लेकिन बड़ी रकम लगाने पर उसे हरा दिया जाता है। लोगों को सट्टे और ऑनलाइन गेमिंग की लत लगाने के लिए लग्जरी लाइफ वाले वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जाते थे।
पकड़े गए शातिरों के अकाउंट में तीन महीने के भीतर एक अरब से ज्यादा का ट्रांजेक्शन मिला है। पुलिस इन सभी से पूछताछ करके पूरे नेटवर्क का खुलासा करने का प्रयास कर रही है। आरोपी चर्चित बेटिंग एप के क्लोन तैयार कर सट्टा खिलवा रहे थे। आरोपियों के गैंग का नाम ब्रांच 24 है। पुलिस इनकी अन्य ब्रांच की भी तलाश कर रही है। -रघुवीर लाल, पुलिस कमिश्नर