जो लोग सीएनजी की बढ़ती हुई कीमतों से परेशान हैं, उनके लिए राहत भरी खबर है। अब गन्ने के रस के कचरे (प्रेसमड) से सीएनजी बनेगी। यह सीएनजी 60 प्रतिशत तक सस्ती मिलेगी। नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट (एनएसआई) की तकनीक पर आधारित सीएनजी प्लांट को कुछ चीनी मिलों ने लगाना शुरू कर दिया है। इसके अलावा शर्करा उद्योग के अन्य समूह भी एनएसआई से संपर्क किए हुए हैं।
एनएसआई के निदेशक प्रोफेसर नरेंद्र मोहन ने बताया कि अभी तक प्रेसमड का निस्तारण चीनी मिलों के लिए सबसे बड़ी उलझन होता था, लेकिन गैस बनने से अब यह कीमती हो गया है। एनएसआई के विज्ञानियों की टीम कई सालों से गन्ने के रस के कचरे पर काम कर रही थी। लंबे शोध के बाद इससे सीएनजी बनाने में सफलता मिली है। पहले यह शोध प्रयोगशाला स्तर पर किया गया। इसमें सफलता के बाद दूसरे चरण का शोध एनएसआई की प्रायोगिक चीनी मिल में किया गया।
यहां प्रेसमड से सीएनजी बनाने का शोध पूरा कर लिया गया है। इसके साथ ही चीनी मिलों के प्रतिनिधियों को बुलाकर इसका प्रदर्शन किया गया। इथेनॉल बनाने के क्षेत्र में आगे आ रहे शर्करा उद्यमियों ने प्रेसमड से सीएनजी बनाने में भी दिलचस्पी दिखाई। निदेशक प्रोफेसर नरेंद्र मोहन ने बताया कि इंडियन पोटाश लिमिटेड की मुजफ्फरनगर स्थित चीनी मिल ने गैस प्लांट लगा लिया है।