क्या है क्लाउड सीडिंग तकनीक
क्लाउड सीडिंग यानी कृत्रिम वर्षा के लिए बादलों में कुछ विशेष रासायनिक पदार्थ जैसे सिल्वर आयोडाइड, सोडियम क्लोराइड या ड्राई आइस का छिड़काव किया जाता है। इन रसायनों से बादलों के अंदर मौजूद सूक्ष्म जलकण संघनित होकर बडे़ बूंदों में बदल जाते हैं जो वजन बढ़ने पर वर्षा के रूप में नीचे गिरते हैं। इस प्रक्रिया को विमान, ड्रोन या जमीन से छोड़े गए फ्लेयर्स के माध्यम से किया जाता है। क्लाउड सीडिंग तभी सफल होती है जब वातावरण में पर्याप्त नमी मौजूद हो और बादल घने हों। यदि हवा बहुत शुष्क हो तो रासायनिक कण आपस में नहीं जुड़ पाते और बारिश नहीं होती। अभियान के दौरान हवा में केवल 20 प्रतिशत नमी थी जबकि कृत्रिम बारिश के लिए कम से कम 50 प्रतिशत नमी आवश्यक होती है। नमी की कमी से बादलों में मौजूद सूक्ष्म जलकण संघनित नहीं हो पाए। क्लाउड सीडिंग के बाद कम से कम 15 मिनट से चार घंटे के बीच बारिश होती है।
तकनीकी रूप से यह प्रयोग पूरी तरह सफल रहा है। हमने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार बादलों में रासायनिक मिश्रण का छिड़काव किया। यदि पर्याप्त नमी होती तो बारिश निश्चित रूप से होती। अभी टीम वहीं पर है बुधवार को दोबारा प्रयास किया जाएगा। -प्रो. मणींद्र अग्रवाल, निदेशक आईआईटी कानपुर