50 प्रतिशत टैरिफ लागू करने का आदेश जारी कर दिया
टैरिफ लगने के बाद से वहां की कंपनियों और खरीदारों ने ऑर्डर निरस्त कर दिए थे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने पिछले साल दो अप्रैल को भारत पर 26 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जो नाै अप्रैल से प्रभावी होना था। हालांकि बाद में इसे 90 दिन तक स्थगित कर दिया गया। बाद में यह नाै जुलाई से प्रभावी किया जाना था फिर इसे 30 जुलाई तक बढ़ा दिया गया। एक अगस्त को रूस से तेल खरीदने पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया, जो सात अगस्त से प्रभावी होना था। फिर इसे 27 अगस्त कर दिया गया और 28 अगस्त की सुबह से 50 प्रतिशत टैरिफ भारत पर लागू करने का आदेश जारी कर दिया गया।
नए निर्यात आर्डरों पर ब्रेक लग गया
पूर्व में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय समझौता होना था जो बेहद करीब पहुंचने के बाद अंतिम रूप नहीं ले सका था। कुछ रुकावटों के बाद बातचीत शुरू हुई थी। सात फरवरी को भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौता की घोषणा की गई थी लेकिन यह अब तक लागू नहीं हुआ था। हालांकि अमेरिकी खरीदारों और शहर के निर्यातकों के बीच बातचीत शुरू हो गई थी। पिछले साल के निर्यात आर्डर के कंसाइनमेंट जाने भी लगे थे। इसी बीच अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट और फिर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ घोषणा से नए निर्यात आर्डरों पर ब्रेक लग गया है।
बीते तीन वर्षों में अमेरिका को कानपुर से निर्यात
- वित्तीय वर्ष 2022-23: 1600 करोड़
- वित्तीय वर्ष 2023-24: 1900 करोड़
- वित्तीय वर्ष 2024-25: 2500 करोड़
राजेंद्र कुमार जालान,पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद
- फोटो : amar ujala
इतनी जल्दी-जल्दी टैरिफ पर बदलाव हो रहा है। इससे पूरे अमेरिकी बाजार और शहर के निर्यातकों में अस्थिरता और असमंजस की स्थिति आ गई है। यह पूरी तरह से अनिश्चितता का दौर है। कोई भी निर्यातक नई डील नहीं कर रहा है। -राजेंद्र कुमार जालान,पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद
यादवेंद्र सचान, चमड़ा उत्पाद निर्यातक
- फोटो : amar ujala
अनिश्चितता होने पर कारोबार करना बेहद मुश्किल हो गया है। निर्यातक और आयातक दोनों परेशान हैं। ये शहर के निर्यातकों के लिए बेहतर होगा कि स्थिरता जल्दी आए। हालांकि उम्मीद है कि जल्द ही परिस्थितियां बदलेंगी। -यादवेंद्र सचान, चमड़ा उत्पाद निर्यातक
आलोक श्रीवास्तव, संयोजक, फियो
- फोटो : amar ujala
18 प्रतिशत शुल्क का अब तक कोई भी आदेश नहीं आया था। इसी बीच 15 प्रतिशत का नया टैरिफ आ गया। तीन प्रतिशत टैरिफ कम जरूर हुआ है लेकिन केवल 150 दिनों के बाद क्या होगा। इससे निर्यातक परेशान हें। नए आर्डर ठप हो गए हैं। -आलोक श्रीवास्तव, संयोजक, फियो